मैड्रिड: बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग और स्वच्छ ऊर्जा की वैश्विक दौड़ के बीच ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा दावा सामने आया है। फिनलैंड की कंपनी वार्टसिला ने स्पेन में दुनिया के पहले 100 प्रतिशत हाइड्रोजन आधारित इंजन की सफल टेस्टिंग की है। इसे ऊर्जा उत्पादन के भविष्य में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह तकनीक आने वाले समय में बिजली उत्पादन के पारंपरिक मॉडल को चुनौती दे सकती है और कोयला समेत सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता कम कर सकती है।
कंपनी के मुताबिक यह इंजन पूरी तरह हाइड्रोजन आधारित प्रणाली पर काम करता है और इसे ग्रीन एनर्जी सेक्टर की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। स्पेन के बर्मेओ शहर में इस तकनीक का परीक्षण किया गया, जहां पहले से नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग पर विशेष जोर दिया जाता रहा है।
क्या है इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत?
अब तक विकसित किए गए कई हाइड्रोजन आधारित सिस्टम पूरी तरह हाइड्रोजन पर निर्भर नहीं थे। उनमें ऊर्जा उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस का भी इस्तेमाल किया जाता था और आमतौर पर मिश्रित ईंधन मॉडल अपनाया जाता था।
लेकिन वार्टसिला के नए मॉडल ‘वार्टसिला 31H2’ को पूरी तरह 100 प्रतिशत हाइड्रोजन आधारित इंजन बताया गया है। इसका उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन में दूसरे ईंधनों पर निर्भरता को न्यूनतम करना है।
क्या सिर्फ पानी से बनेगी बिजली?
इस तकनीक का मूल आधार हाइड्रोजन ईंधन है। प्रक्रिया के तहत पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है। इसके बाद हाइड्रोजन का उपयोग इंजन प्रणाली में ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, जिससे जुड़े जेनरेटर बिजली उत्पादन करते हैं।
इस मॉडल की एक बड़ी विशेषता यह भी बताई जा रही है कि अतिरिक्त ऊर्जा उपलब्ध होने पर हाइड्रोजन को संग्रहित किया जा सकता है और बाद में जरूरत के समय उसका उपयोग किया जा सकता है। इससे बिजली आपूर्ति को लगातार बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
सोलर और विंड एनर्जी से क्यों अलग माना जा रहा है?
हाइड्रोजन आधारित इस मॉडल को इसलिए अलग माना जा रहा है क्योंकि इसकी कार्यक्षमता सीधे मौसम पर निर्भर नहीं बताई जा रही। जहां सौर ऊर्जा उत्पादन दिन के समय और धूप की उपलब्धता पर निर्भर करता है, वहीं पवन ऊर्जा के लिए लगातार हवा और उपयुक्त स्थान की आवश्यकता होती है।
ऐसे में हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा प्रणाली को लगातार बिजली उपलब्ध कराने वाले विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इसके बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए उत्पादन लागत, हाइड्रोजन स्टोरेज और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी चुनौतियां भी अहम रहेंगी।
क्या AI डेटा सेंटरों के लिए बदल जाएगा भविष्य?
दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सेंटरों की बिजली मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में हाइड्रोजन आधारित इंजन को भविष्य के ऊर्जा विकल्पों में शामिल किया जा रहा है।
फिलहाल कई बड़े डेटा सेंटर ऊर्जा के लिए पारंपरिक और वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस नई तकनीक को ऊर्जा आपूर्ति के संभावित नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
क्या बिजली संकट पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
विशेषज्ञों के अनुसार केवल एक तकनीक से पूरी दुनिया की बिजली समस्या खत्म होना अभी कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा प्रणालियां भविष्य में स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा समाधान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं। बड़े स्तर पर इसका असर उत्पादन लागत, इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी विस्तार पर निर्भर करेगा।
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