नई दिल्ली: केला सबसे आसानी से मिलने वाले और पौष्टिक फलों में गिना जाता है। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ज्यादातर लोगों की पसंद होता है। शरीर को तुरंत ऊर्जा देने वाला यह फल फाइबर और पोटैशियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति के लिए केला समान रूप से फायदेमंद नहीं होता। कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में इसका सेवन सीमित करने या पूरी तरह बचने की सलाह दी जाती है।
विशेषज्ञ के अनुसार केला किसी भी रूप में खाया जा सकता है। रोजाना 1 से 2 केले खाने से शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है। एक केले में करीब 400 मिलीग्राम पोटैशियम होता है, जो मांसपेशियों और नसों के बेहतर कामकाज के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा केला फाइबर का भी अच्छा स्रोत है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
विशेषज्ञ का कहना है कि किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या वाले लोगों को केला खाने से बचना चाहिए। ऐसे मरीजों के शरीर में पहले से ही पोटैशियम का स्तर अधिक हो सकता है और किडनी अतिरिक्त पोटैशियम को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाती। ऐसी स्थिति में केला और नारियल पानी जैसे पोटैशियम से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन नुकसान पहुंचा सकता है। इन मरीजों को अपने पोटैशियम स्तर की नियमित निगरानी भी करनी चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति का ब्लड शुगर नियंत्रित है, तो वह सीमित मात्रा में एक छोटा केला खा सकता है। विशेषज्ञ के मुताबिक केले का ग्लाइसेमिक लोड कम होता है, जबकि ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत अधिक होता है। इससे थोड़े समय के लिए ब्लड शुगर बढ़ सकता है, लेकिन यह लंबे समय तक ऊंचा नहीं रहता। हालांकि जिन लोगों का ब्लड शुगर लगातार नियंत्रण से बाहर रहता है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही आहार लेना चाहिए और केला खाने से बचना चाहिए।
विशेषज्ञ के अनुसार जिन लोगों को अत्यधिक सर्दी-जुकाम, कफ या बलगम की समस्या रहती है, उन्हें केला खाने से बचना चाहिए। अस्थमा के मरीजों को भी खासकर सर्दियों और बरसात के मौसम में केला न खाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा अधिक मात्रा में केला खाने से कुछ लोगों को गैस, एसिडिटी और पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों को भी केले का सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए।
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