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Bankipur Bypoll Result: भाजपा का 31 साल पुराना गढ़ ढहा, जानिए प्रशांत किशोर ने कैसे पलट दिया पूरा चुनावी गणित

पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने पहले ही चुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। लंबे समय से भाजपा के प्रभाव वाली इस सीट पर मिली यह जीत राज्य की राजनीति में अहम घटनाक्रम मानी जा रही है। परिणाम के बाद जनसुराज समर्थकों में उत्साह का माहौल है, जबकि भाजपा के लिए इसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद रिक्त हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया।

क्यों खास रही बांकीपुर सीट?

बांकीपुर विधानसभा सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। वर्ष 1995 से इस सीट पर भाजपा का लगातार कब्जा रहा। 1995 से 2005 तक नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर ने, तब पटना पश्चिम के नाम से जानी जाने वाली इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। उनके निधन के बाद 2006 के उपचुनाव में नितिन नवीन विजयी हुए और 2010 से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके इस्तीफे से सीट खाली हुई और उपचुनाव की नौबत आई।

उपचुनाव में किसके बीच था मुकाबला?

इस उपचुनाव में भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया। पार्टी ने नामांकन समाप्त होने से ठीक पहले अपना प्रत्याशी बदला था। राष्ट्रीय जनता दल ने एक बार फिर रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा, जिन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव में भी इसी सीट से चुनाव लड़ा था। वहीं, जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार स्वयं चुनावी मैदान में उतरे और सीधे बांकीपुर से किस्मत आजमाई। इसी वजह से यह उपचुनाव पूरे राज्य की राजनीतिक नजरों का केंद्र बना रहा।

भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध

भाजपा को उम्मीद थी कि बांकीपुर का पारंपरिक सामाजिक समीकरण उसके पक्ष में रहेगा। यहां करीब 33 प्रतिशत सवर्ण मतदाता हैं, जिनमें लगभग 14 प्रतिशत कायस्थ समुदाय से आते हैं। भाजपा उम्मीदवार भी इसी समाज से थे, इसलिए पार्टी को अपने पारंपरिक समर्थन पर भरोसा था। हालांकि, चुनाव परिणाम ने संकेत दिया कि प्रशांत किशोर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में भी प्रभावी सेंध लगाने में सफल रहे।

बांकीपुर का जातीय समीकरण

सवर्ण – 33 प्रतिशत
कायस्थ – 14 प्रतिशत
गैर-कायस्थ सवर्ण – 19 प्रतिशत
यादव – 12 प्रतिशत
वैश्य – 12 प्रतिशत
दलित – 8 प्रतिशत
मुस्लिम – 9 प्रतिशत

प्रशांत किशोर की जीत के पीछे क्या रही रणनीति?

प्रशांत किशोर ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। बांकीपुर में लगभग 7 प्रतिशत ब्राह्मण, 7 प्रतिशत भूमिहार और 5 प्रतिशत राजपूत मतदाता हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने स्वयं को भाजपा के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। माना जा रहा है कि उन्होंने अपर कास्ट और ईबीसी मतदाताओं के एक हिस्से को अपने पक्ष में आकर्षित किया। साथ ही, राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें राजद के पारंपरिक मुस्लिम वोटों का भी समर्थन मिला। राजद के कुछ नेताओं ने भी दावा किया कि भाजपा और जदयू के वोटों का एक हिस्सा जनसुराज के पक्ष में गया, जिसका असर परिणाम में दिखाई दिया।

vineet verma

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