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लोकसभा में बिल फेल, बाहर बढ़ा बवाल! विपक्ष बोला—बिना परिसीमन तुरंत लागू करो महिला आरक्षण

नई दिल्ली, 19 अप्रैल 2026 — लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल के गिरने के बाद सियासत और गरमा गई है। अब विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को सीधे प्रधानमंत्री Narendra Modi तक ले जाने का फैसला किया है और जल्द ही एक संयुक्त पत्र भेजने की तैयारी है।

विपक्ष का कहना है कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए परिसीमन (Delimitation) का इंतजार करना जरूरी नहीं है। मौजूदा 543 सीटों पर ही इसे लागू किया जा सकता है, लेकिन सरकार जानबूझकर इसे टाल रही है।

विपक्ष का दबाव बढ़ा, ‘तुरंत लागू करो’ की मांग

INDIA गठबंधन का साफ कहना है कि अगर सरकार सच में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो पुराने कानून में छोटा सा संशोधन करके इसे तुरंत लागू किया जा सकता है।

विपक्ष अब देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाने वाला है। उनका आरोप है कि बीजेपी महिला आरक्षण को “कवर” बनाकर सीटों की संख्या बढ़ाने और बड़े संवैधानिक बदलाव की तैयारी कर रही है।

रेवंत रेड्डी का तीखा हमला

तेलंगाना के मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने इस पूरे विवाद पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ बिल की हार नहीं, बल्कि बीजेपी की “नीयत की हार” है।

रेड्डी ने आरोप लगाया, “महिलाओं के आरक्षण के नाम पर संविधान बदलने और दलित-आदिवासी आरक्षण को कमजोर करने की साजिश रची जा रही थी। असली मकसद सीटें बढ़ाकर दो-तिहाई बहुमत हासिल करना था।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर महिलाओं को आरक्षण देना ही मकसद होता, तो 2023 के कानून में मामूली बदलाव कर इसे लागू किया जा सकता था। परिसीमन से जुड़े बिलों को उन्होंने “मास्क” करार दिया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, 2023 में संसद ने Nari Shakti Vandan Adhiniyam पास किया था, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान है।

लेकिन इसकी लागू होने की शर्त परिसीमन और अगली जनगणना से जोड़ी गई थी, जिससे यह 2029 या उसके बाद ही लागू हो सकता है। हालिया संशोधन बिल इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश था, लेकिन लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण पास नहीं हो सका।

आगे क्या?

अब यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक टकराव बनता दिख रहा है। विपक्ष जहां बिना परिसीमन के तुरंत आरक्षण लागू करने की मांग पर अड़ा है, वहीं सरकार का कहना है कि विपक्ष महिलाओं के अधिकारों के साथ राजनीति कर रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस पर नया बिल लाती है या फिर यह मुद्दा 2026 की सियासत का बड़ा चुनावी एजेंडा बन जाता है।

news desk

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