नई दिल्ली: अरेंज मैरिज के बाद एक शख्स की जिंदगी में ऐसा मोड़ आया, जिसकी उसने शायद कल्पना भी नहीं की थी। सोशल मीडिया पर वायरल एक आपबीती में शख्स ने दावा किया कि शादी की पहली रात ही उसकी पत्नी ने कह दिया कि वह उसे पसंद नहीं करती और यह शादी उसने परिवार के दबाव में की है। इसके बाद दोनों अलग हो गए और तलाक की कानूनी प्रक्रिया करीब 2 साल तक चली। शख्स के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में उसे करीब 10 लाख रुपये भी खर्च करने पड़े।
यह कहानी सोशल मीडिया मंच एक्स पर @fintech_shark नाम के हैंडल से साझा की गई पोस्ट के जरिए सामने आई है। पोस्ट मूल रूप से रेडिट पर साझा की गई एक आपबीती पर आधारित बताई गई है। शख्स के अनुसार, शादी से पहले वह करीब 8 महीने तक अपनी मंगेतर से बातचीत करता रहा था और दोनों के बीच अच्छा तालमेल था। मंगेतर ने शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने से इनकार किया था, जिसका उसने सम्मान किया।
शख्स के दावे के मुताबिक, शादी के बाद जब दोनों पहली बार अपने कमरे में पहुंचे तो पत्नी ने उसे बताया कि वह उसे पसंद नहीं करती। उसने यह भी कहा कि शादी के लिए उस पर उसके माता-पिता का दबाव था।
पत्नी ने कथित तौर पर बताया कि परिवार ने उसे खुद को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी, जिसकी वजह से उसने इस शादी के लिए हामी भरी। आपबीती के मुताबिक, पत्नी ने यह भी कहा कि अगर वह चाहे तो जबरदस्ती शारीरिक संबंध बना सकता है। हालांकि, शख्स ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और खुद को उससे अलग कर लिया।
शादी के बाद दोनों के बीच रिश्ते सामान्य नहीं हो सके और मामला तलाक तक पहुंच गया। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने जब शख्स से पूछा कि तलाक लेने में उसे कितना समय और पैसा लगा, तो उसने बताया कि पूरी प्रक्रिया करीब 2 साल चली।
शख्स के मुताबिक, इस दौरान एलिमनी और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े खर्च के तौर पर उसे करीब 10 लाख रुपये देने पड़े। हालांकि, वायरल पोस्ट में इस मामले की स्वतंत्र पुष्टि से जुड़ी कोई जानकारी सामने नहीं आती है।
यह आपबीती सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर शादी, पुरुषों के अधिकार और तलाक से जुड़े कानूनी प्रावधानों को लेकर बहस शुरू हो गई। कई यूजर्स ने शख्स के अनुभव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दो साल का समय और 10 लाख रुपये का खर्च काफी बड़ा नुकसान है।
वहीं, कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर दोनों के बीच शारीरिक संबंध नहीं बने थे तो क्या तलाक के बजाय शादी को रद्द कराने का कानूनी विकल्प अपनाया जा सकता था। हालांकि, किसी मामले में कौन-सा कानूनी रास्ता उपलब्ध होगा, यह उसके तथ्यों और लागू कानून पर निर्भर करता है।
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