नई दिल्ली: हार्ट अटैक एक गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति है, जिसमें हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनी में अचानक रुकावट आ जाती है। ऐसे मामलों में इलाज मिलने में जितनी देरी होती है, हृदय की मांसपेशियों को नुकसान का खतरा उतना ही बढ़ता है। इसलिए हार्ट अटैक के लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। डॉक्टर हरनिश सिंह भाटिया, सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी, फोर्टिस, ग्रेटर नोएडा बता रहे हैं कि हार्ट अटैक के आम लक्षण क्या होते हैं और ऐसी स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले कौन से जरूरी कदम उठाने चाहिए।
हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण सीने में दर्द या दबाव महसूस होना है। मरीज को सीने में जकड़न, भारीपन, जलन या दबाव जैसा अहसास हो सकता है। यह दर्द अक्सर कुछ मिनटों से ज्यादा समय तक बना रह सकता है या बीच-बीच में आता-जाता रह सकता है।
कई मामलों में यह दर्द बाएं हाथ या दोनों हाथों, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है। इसके साथ सांस फूलना, ठंड लगना, पसीना आना, मितली या उल्टी, चक्कर, अत्यधिक कमजोरी और बेचैनी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
हर मरीज में हार्ट अटैक के लक्षण एक जैसे नहीं होते। खासतौर पर महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज से पीड़ित लोगों में सीने में तेज दर्द के बजाय सांस फूलना, कमजोरी, अपच या असामान्य थकान जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
इसलिए ऐसे लक्षणों को सामान्य थकान, गैस या अपच समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर जब इनके साथ सांस फूलना या अचानक पसीना आने जैसी समस्या भी हो।
अगर किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई दें तो सबसे जरूरी है कि समय बर्बाद न किया जाए। मरीज को तुरंत बैठाएं या आराम की स्थिति में रखें और एंबुलेंस या आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए फोन करें।
मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल नहीं जाना चाहिए। चिकित्सा सहायता आने तक उसे शांत रखने और अनावश्यक शारीरिक गतिविधि से बचाने की कोशिश करनी चाहिए।
अगर मरीज होश में है और गोली निगलने में सक्षम है, तो 150 से 325 मिलीग्राम एस्पिरिन चबाना मददगार हो सकता है। हालांकि, यह तभी किया जाना चाहिए जब मरीज को एस्पिरिन से एलर्जी न हो, सक्रिय रक्तस्राव न हो और डॉक्टर ने पहले से एस्पिरिन न लेने की स्पष्ट सलाह न दी हो।
सिर्फ गैस या एसिडिटी मानकर सीने में असामान्य दर्द, पसीना या सांस फूलने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
अगर मरीज बेहोश हो जाए और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो तुरंत सीपीआर शुरू करना चाहिए। अगर आसपास एईडी यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर उपलब्ध हो, तो उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
हार्ट अटैक में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। इसलिए लक्षणों को पहचानकर जल्द से जल्द आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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