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पुतिन के भारत दौरे पर क्यों है दुनिया की नजर? 28 घंटे का पुतिन का मेगा प्लान, कई अहम डील्स पर होगी PM मोदी से चर्चा!

रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे को लेकर पूरे विश्व की नजरें टिकी हुईं हैं | यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद ये उनकी पहली भारत यात्रा है, जो दिल्ली में होने जा रही है | ये दौरा इंडिया और रूस की कई दशक पुरानी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को सेलिब्रेट करने का मौका है | पुतिन के दौरे के दौरान दो दिनों में दोनों देश पॉलिटिक्स, इकोनॉमी, डिफेंस, एनर्जी, साइंस-टेक, कल्चर और ह्यूमैनिटेरियन सेक्टर्स में टफ टॉक्स करेंगे. जिसका असर दुनिया की कूटनीति पर पड़ेगा |इसलिए यूरोपियन देशों समेत अमेरिका भी इस दौरे पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं |

स्पेशल अराइवल और हाई-प्रोफाइल मीटिंग
प्रेसिडेंट पुतिन अपने खास ‘फ्लाइंग कमांड सेंटर’ IL-96 जेटलाइनर से गुरूवार की शाम इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड करेंगे | नेशनल कैपिटल में 5-लेयर सिक्योरिटी कवर है | दिल्ली पुलिस, सेंट्रल एजेंसीज, SWAT टीमें, एंटी-टेरर स्क्वॉड और पुतिन की पर्सनल सिक्योरिटी टीमें हर कोने पर नज़र रखेंगी | एयरपोर्ट से पुतिन सीधा 7, लोक कल्याण मार्ग, जहां PM नरेंद्र मोदी के साथ उनका प्राइवेट डिनर शेड्यूल है |

पुतिन का नॉन-स्टॉप एजेंडा
अगले दिन, 5 दिसंबर का पूरा दिन पूरी तरह से पैक रहने वाला है | सुबह 11 बजे, राष्ट्रीय भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनका स्वागत करेंगी और उन्हें शानदार गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा | और इसके बाद पुतिन राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे. इसके बाद वो हैदराबाद हाउस में 23वां इंडिया-रशिया एनुअल समिट होगा |

पहले PM मोदी और पुतिन वन-ऑन-वन बात करेंगे, जिसके बाद डेलीगेशन लेवल पर बातचीत होगी | एजेंडे में डिफेंस डील्स टॉप पर हैं और SU-57 फाइटर जेट, S-500 मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल के नए वर्जन पर होने की खबर है | दोनों लीडर्स 65 बिलियन डॉलर के इंडियन इंपोर्ट और सिर्फ 5 बिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट के मेजर ट्रेड गैप को ठीक करने की स्ट्रैटेजी पर भी बात करेंगे | इसके अलावा एनर्जी और ऑयल कोऑपरेशन भी टॉक पॉइंट्स में हैं |

पुतिन की यात्रा को लेकर दुनिया की नजर इसलिए टिकी हुई है क्योंकि फिलहाल रूस और यूक्रेन की जंग जारी है | जिसमें यूरोपीय देश यूक्रेन के साथ हैं। वहीं अमेरिका पिछले दिनों भारत पर टैरिफ बढ़ा कर रूस के साथ भारत के व्यापार पर दवाब बनाने की कोशिश कर चुका है। जिसमें सबसे अहम है रूस के साथ कच्चे तेल का सौदा। ऐसे में अमेरिका और यूरोपीय देश रूस के साथ भारत के रूख को देखना चाहते हैं |

news desk

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