सियासी

कौन हैं हिरेन जोशी? जिनके नाम से हिल रही राजनीति और सोशल मीडिया पर मचा तूफान!

हिरेन जोशी यह नाम एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में है. न सिर्फ़ सोशल मीडिया, बल्कि कांग्रेस भी इस नाम को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोल रही है. अब सवाल यह है कि आखिर हिरेन जोशी हैं कौन, जिनके चलते राजनीतिक हलकों में हलचल मची है?

माना जाता है कि हिरेन जोशी पीएमओ के वह प्रभावशाली अधिकारी हैं, जिनके एक फोन कॉल से मीडिया की दिशा बदल सकती है. टीवी चैनलों पर क्या चलेगा और क्या नहीं, इस पर उनकी राय को बेहद अहम माना जाता है.

लेकिन अचानक ये नाम चर्चा में क्यों हैं? दरअसल, पिछले 48 घंटों में सोशल मीडिया पर तीन नाम लगातार ट्रेंड कर रहे हैं:

हिरेन जोशी(PMO)

हितेश जैन (लॉ कमीशन)

नवनीत सहगल (प्रसार भारती)

इन नौकरशाहों के नामों के ट्रेंड होने से कयासों का बाज़ार गर्म है. ब्यूरोक्रेसी के इन बड़े नामों का एक साथ चर्चा में आने से विपक्ष ये सवाल उठा रहा है कि केंद्र सरकार के भीतर कुछ ठीक नहीं चल रहा, और इसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में अनेक सवाल उठ रहे हैं.

कांग्रेस ने की सरकार से जवाबदेही की मांग

कांग्रेस ने बुधवार को पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारी हिरेन जोशी पर गंभीर सवाल उठाते हुए सरकार से उनके कथित बिज़नेस पार्टनर्स, विदेशी संपर्कों और इनसे जुड़े मामलों के भारत के राष्ट्रीय हितों पर संभावित प्रभाव को लेकर पूरी पारदर्शिता की मांग की है.

उधर, प्रसार भारती के चेयरमैन नवनीत सहगल के अचानक देर रात इस्तीफा देने से हलचल और बढ़ गई है. माना जा रहा है कि हिरेन जोशी से जुड़े आरोपों के बाद सहगल का इस्तीफा भी उसी घटनाक्रम का हिस्सा हो सकता है. हालांकि, चर्चा यह भी है कि सहगल को दिल्ली में नई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, या वे भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

कांग्रेस के निशाने पर हिरेन जोशी

हिरेन जोशी को लेकर कांग्रेस पहले भी मोदी सरकार पर हमला बोल चुकी है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मामले पर कहा कि ‘सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए, क्योंकि अब “पीएमओ की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.

हिरेन जोशी के एक करीबी सहयोगी जिन्हें लगभग सात महीने पहले लॉ कमीशन में नियुक्त किया गया था, उन्हें अचानक हटाया गया और उनका सरकारी आवास भी तुरंत खाली करा दिया गया. इस घटनाक्रम को लेकर उन्होंने कई गंभीर सवाल उठाए’.

खेड़ा ने कहा “देश को यह जानने का अधिकार है कि हिरेन जोशी के बिजनेस पार्टनर कौन हैं. पीएमओ में बैठकर वह कौन-सा बिजनेस चला रहे थे, इसकी भी पारदर्शिता जरूरी है. किस बेटिंग ऐप में उनकी कथित हिस्सेदारी थी. यह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय है। सरकार यदि स्पष्ट जवाब नहीं देगी, तो ये चर्चाएं यू़ं ही चलती रहेंगी, चाहे वे कितने भी ऐप बंद कर दें.”

खेड़ा ने आगे दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि ‘जोशी के कई बिजनेस इंटरेस्ट और विदेशी संपर्क हैं. विदेश यात्राओं के दौरान वे किन लोगों से मिले?

क्या उनके इन संपर्कों के चलते भारत के राष्ट्रीय हित पर कोई असर पड़ा? यह सामने आना जरूरी है. लोकतंत्र को इतनी आसानी से दबाया नहीं जा सकता. अब पीएमओ की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है’.

कुल मिलाकर, इस ताज़ा विवाद ने कांग्रेस को सरकार के खिलाफ एक नया राजनीतिक हथियार थमा दिया है, जिसे वह अब सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह-पूरी मजबूती से उठा रही है. अब निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि बीजेपी इस मामले में अगला कदम क्या उठाती है.

news desk

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