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क्यों बढ़ता जा रहा “हंतावायरस” का खतरा! चूहों से फैलने वाला यह संक्रमण कितना जानलेवा? जानें लक्षण और बचाव के तरीके

कोरोना के बाद से दुनिया भर में रोज नए नए वायरसों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच एक नया वायरल तेज़ी से फ़ैल रहा है जिसका नाम है ‘हंतावायरस’। ‘हंतावायरस’ ने हेल्थ एक्सपर्ट्स और आम जनता की चिंता को बढ़ा दी है। हालांकि यह कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इससे डेथ रेट और इन्फेक्शन के गंभीर प्रभाव इसे बेहद खतरनाक बनाते हैं। यह वायरल से चूहों और रोदेंट्स जैसे गिलहरी, बीवर,साही, हैम्स्टर, गिनी पिग,प्रेयरी डॉग, और कैपीबारा के जरिए इंसानों में फैलता है।

क्या है हंतावायरस?

हंतावायरस वायरसों का एक परिवार है, जो मुख्य रूप से चूहों द्वारा फैलता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह वायरस संक्रमित चूहों के मल, मूत्र या लार में मौजूद होता है। यह वायरस हवा के जरिए ट्रैवल करता है, धूल के साथ मिलकर यह इतना बारीक हो जाता है कि सांस लेते वक्त आपको पता भी नहीं चलता कि यह आपके अंदर जा रहा है।

सामान्य फ्लू जैसा दिखने वाला, लेकिन है जानलेवा

हंतावायरस एक ऐसा वायरस है, जिसके शुरुआती लक्षण अक्सर नार्मल फ्लू जैसे लगते हैं। यही वजह है कि कई बार लोग इसे हल्के में ले लेते हैं। लेकिन समय रहते पहचान और इलाज न हो, तो यह गंभीर रूप ले सकता है। शुरुआत में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, खासकर जांघों और पीठ में, बहुत ज्यादा थकान, उल्टी, पेट दर्द जैसे लक्षण शुरू हो जाते है, इन लक्षणों को देखकर इसे आम वायरल या फ्लू समझने की गलती हो सकती है।

अगर संक्रमण बढ़ जाए और समय पर इलाज न मिले, तो यह हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) में बदल सकता है। इस स्थिति में फेफड़ों में पानी इक्कठा होने लगता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यह एक जानलेवा स्थिति हो सकती है, और इसमें मृत्यु दर भी काफी अधिक मानी जाती है।

भारत में स्थिति

भारत में हंतावायरस के मामले बहुत कम पाए जाते हैं। फिर भी, ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में, जहां चूहों की संख्या ज्यादा होती है, वहां खास सतर्कता जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्रालय और NCDC समय-समय पर इसके जोखिम को लेकर सलाह जारी करते रहते हैं।

बचाव ही है उपाय

हंतावायरस से बचने के लिए जागरूकता और सावधानी सबसे जरूरी है, क्योंकि इसका कोई खास टीका या पक्का इलाज अभी नहीं है एक्सपर्ट्स के पास।

कुछ जरूरी सावधानियों से बचा जा सकता है इससे

घर, गोदाम और रसोई में चूहों को अंदर आने से रोकें, पुरानी, बंद या धूल भरी जगहों की सफाई करते समय N95 मास्क और दस्ताने पहनें,चूहों के मल या मूत्र को झाड़ू से न साफ़  करे सबसे पहले उस जगह पर ब्लीच या जर्म-किलर दवाई डालें, ताकि वायरस हवा में न फैले और सबसे अहम बात खाने-पीने की चीजें हमेशा ढककर रखें।

news desk

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