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“आखिरी दम तक लड़ूंगी, हार नहीं मानूंगी” ममता बनर्जी ने इस्तीफ़ा देने से किया इनकार! अब कैसे बनेगी नई सरकार, क्या करेंगे गवर्नर?

पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राजभवन के बीच का टकराव अब एक ऐसे ‘संवैधानिक गतिरोध’ में बदल गया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वो किसी भी कीमत पर इस्तीफा नहीं देंगी, वहीं दूसरी तरफ 9 मई को नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की अटकलों ने सियासी बाजार गर्म कर दिया है।

“आखिरी दम तक लड़ूंगी, हार नहीं मानूंगी”


ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि उनके पास विधानसभा में जनता द्वारा दिया गया पूर्ण बहुमत है। उन्होंने विपक्षी दबाव को खारिज करते हुए कहा कि एक निर्वाचित सरकार को इस तरह मजबूर नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार का तर्क है कि जब तक उनके पास विधायकों का संख्या बल है, उन्हें पद से हटाना असंवैधानिक होगा।

राज्यपाल के विकल्प और संवैधानिक पेच


रिपोर्ट के अनुसार, राज्यपाल आर.एन. रवि और मुख्यमंत्री के बीच सीधा संवाद बंद हो चुका है। राज्यपाल अब उन विकल्पों पर विचार कर रहे हैं जो संविधान उन्हें ऐसी स्थिति में प्रदान करता है: राज्यपाल मुख्यमंत्री को सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं।

अनुच्छेद 356 के तहत यदि कानून-व्यवस्था और संवैधानिक ढांचा पूरी तरह विफल पाया जाता है, तो राज्यपाल केंद्र को राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भेज सकते हैं।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 9 मई को राज्य में नए नेतृत्व का शपथ ग्रहण हो सकता है, लेकिन बिना ममता बनर्जी के इस्तीफे या सरकार गिरने के यह कानूनी रूप से कैसे संभव होगा, इस पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है।

क्या कहता है संविधान?


विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के संविधान में राज्यपाल की शक्तियां सीमित हैं। एस.आर. बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, किसी भी सरकार के बहुमत का फैसला राजभवन में नहीं, बल्कि विधानसभा की दहलीज पर होना चाहिए। जब तक टीएमसी (TMC) के विधायक एकजुट हैं, ममता सरकार को गिराना केंद्र और राज्यपाल के लिए एक बड़ी कानूनी चुनौती होगी।

आगे क्या होगा?


आने वाले कुछ दिन बंगाल की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक हैं। क्या ममता बनर्जी को फ्लोर टेस्ट के लिए मजबूर किया जाएगा? या फिर बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट सुनाई देगी? फिलहाल पूरी नजर राजभवन की अगली कार्रवाई और 9 मई को होने वाले संभावित घटनाक्रमों पर टिकी है।

news desk

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