नई दिल्ली: सोने की कीमतों पर तो हर किसी की नजर रहती है, लेकिन चांदी की तेजी अब एक अलग कहानी बयां कर रही है। चांदी सिर्फ गहनों, बर्तनों या निवेश तक सीमित नहीं रह गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ दुनिया भर में तेजी से बन रहे डेटा सेंटर और नए AI सर्वर इसकी मांग को एक नई दिशा दे रहे हैं। चांदी बिजली की सबसे अच्छी चालक धातुओं में शामिल है और इसी वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स तथा डेटा सेंटर से जुड़े उपकरणों में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है।
सोने की अपनी पुरानी चमक है। सदियों से इसे संपत्ति, सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता रहा है। राजाओं के खजानों से लेकर मंदिरों और शादियों तक सोने का इस्तेमाल होता आया है। दुनिया के केंद्रीय बैंक भी अपने भंडार में सोना रखते हैं। चांदी को लंबे समय तक सोने के मुकाबले कम कीमत वाली धातु के तौर पर देखा गया। लेकिन अब इसकी भूमिका तेजी से बदल रही है।
AI का बढ़ता दायरा और डेटा सेंटर की होड़
आज फोन या कंप्यूटर पर AI से कोई सवाल पूछने पर कुछ ही सेकंड में जवाब, तस्वीर या वीडियो तैयार हो जाता है। इसके पीछे सिर्फ कोई सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि विशाल डेटा सेंटर काम करते हैं। इन केंद्रों में बड़ी संख्या में कंप्यूटर और AI सर्वर लगातार काम करते हैं। उपयोगकर्ता की ओर से भेजा गया डेटा इन्हीं प्रणालियों तक पहुंचता है और यहीं से जवाब वापस आता है।
AI के विस्तार के साथ दुनिया भर में डेटा सेंटर बनाने की होड़ तेज हो गई है। कंपनियां और सरकारें इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहतीं। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और मेटा जैसी बड़ी कंपनियां डेटा सेंटरों पर भारी निवेश कर रही हैं। वजह यह है कि AI का मुकाबला अब सिर्फ बेहतर सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित नहीं है। बड़े AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और बड़ी संख्या में लोगों को तेज जवाब देने के लिए ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता, ज्यादा सर्वर और ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती है।
डेटा सेंटर में चांदी की जरूरत क्यों पड़ रही?
यहीं से चांदी की कहानी शुरू होती है। सवाल यह है कि डेटा सेंटर के उपकरणों में चांदी की जरूरत क्यों है? सोने या तांबे का इस्तेमाल क्यों नहीं?
चांदी बिजली की सबसे अच्छी चालक धातुओं में से एक है। तांबा भी बिजली का अच्छा चालक है, लेकिन चांदी में विद्युत प्रवाह के लिए बेहतर चालकता पाई जाती है। डेटा सेंटर में बिजली के प्रवाह के दौरान प्रतिरोध से गर्मी पैदा होती है। ऐसे में बिजली के बेहतर संचालन और सर्किट में होने वाले नुकसान को कम करना अहम हो जाता है।
AI डेटा सेंटर में यह जरूरत और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वहां इस्तेमाल होने वाले सर्वर और रैक बहुत अधिक बिजली की खपत करते हैं। बिजली के प्रवाह में होने वाला नुकसान गर्मी बढ़ा सकता है और अत्यधिक गर्मी की स्थिति में चिप अपनी सुरक्षा के लिए काम करने की गति कम कर सकती है। इसे थ्रॉटलिंग कहा जाता है। चांदी का इस्तेमाल बिजली के प्रवाह और सिग्नल के संचालन में मदद करता है।
AI सर्वर में पुराने सिस्टम से ज्यादा चांदी
चांदी की बढ़ती मांग का एक बड़ा कारण AI सर्वरों में इसका बढ़ता इस्तेमाल भी बताया जा रहा है। पुराने कंप्यूटर सर्वर में जहां करीब 60 ग्राम चांदी का इस्तेमाल होता था, वहीं नए AI सर्वर में यह मात्रा 180 ग्राम से ज्यादा बताई गई है।
यहां मामला सिर्फ एक सर्वर का नहीं है। दुनिया भर में हजारों सर्वर और सैकड़ों रैक तैयार किए जा रहे हैं। इनके साथ नए AI डेटा सेंटर भी तेजी से बन रहे हैं। बिजली पहुंचाने वाले तारों, स्विचगियर और बैकअप सिस्टम जैसे हिस्सों में भी चांदी का इस्तेमाल होता है।
दुनिया की चांदी पर बढ़ता AI का दबाव
AI डेटा सेंटरों की बढ़ती संख्या के साथ चांदी की खपत भी बढ़ रही है। खबर के मुताबिक, दुनिया में निकलने वाली कुल चांदी का करीब 10 प्रतिशत डेटा सेंटर इस्तेमाल कर रहे हैं। चिली दुनिया में चांदी निकालने वाला छठा सबसे बड़ा देश है और दावा है कि एक साल में वहां जितनी चांदी निकाली जाती है, लगभग उतनी ही मात्रा डेटा सेंटरों की जरूरत पूरी करने में खप रही है।
डेटा सेंटरों की बिजली क्षमता में भी बड़ा बदलाव आया है। साल 2000 में दुनिया के IT केंद्रों की कुल बिजली क्षमता 1 GW से कम थी, जबकि अब AI डेटा सेंटरों में 50 GW क्षमता पहुंच चुकी है। इसका सीधा मतलब यह है कि AI का विस्तार जितना बढ़ेगा, उससे जुड़े बुनियादी ढांचे और उनमें इस्तेमाल होने वाली औद्योगिक धातुओं की जरूरत भी बढ़ सकती है।
क्या चांदी बन रही है भविष्य की धातु?
चांदी का इस्तेमाल सिर्फ AI डेटा सेंटर तक सीमित नहीं है। पहले इसका बड़ा हिस्सा गहनों, बर्तनों और सिक्कों में इस्तेमाल होता था। फोटोग्राफी के दौर में फिल्म बनाने के लिए भी चांदी की मांग थी, लेकिन डिजिटल कैमरों के आने के बाद यह मांग काफी कम हो गई।
आज गहने और बर्तन बनाने में चांदी का इस्तेमाल जारी है, हालांकि कीमत बढ़ने पर इसकी खरीद प्रभावित हो सकती है। दूसरी तरफ सौर पैनल में भी चांदी का इस्तेमाल होता है और वहां कम मात्रा में चांदी से काम चलाने की तकनीक विकसित हो रही है।
AI से जुड़ी मांग फिलहाल एक अलग तस्वीर पेश करती है। नए AI सर्वर, डेटा सेंटर और उनसे जुड़े बिजली ढांचे में चांदी की जरूरत बढ़ रही है। इसी वजह से चांदी को अब सिर्फ पारंपरिक कीमती धातु के तौर पर नहीं, बल्कि AI और आधुनिक तकनीक से जुड़ी एक अहम औद्योगिक धातु के रूप में भी देखा जा रहा है।
यही बदलाव चांदी की मौजूदा तेजी को समझने की एक अहम कड़ी है। सोने की मांग जहां सदियों पुरानी परंपराओं, निवेश और भंडार से जुड़ी है, वहीं चांदी की नई मांग का एक बड़ा हिस्सा तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और अब AI के बढ़ते बुनियादी ढांचे से जुड़ता जा रहा है।