नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 28 जून से जारी सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की गैरमौजूदगी अब राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। जहां कई विपक्षी दलों के नेता आंदोलन को समर्थन दे चुके हैं, वहीं राहुल गांधी अब तक न तो धरनास्थल पहुंचे हैं और न ही सार्वजनिक रूप से इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं। ऐसे में उनकी रणनीति को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार सवाल उठ रहे हैं।
राहुल गांधी की इस दूरी को लेकर सोशल मीडिया पर भी लगातार चर्चा हो रही है। इसी बीच कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर राहुल गांधी की सक्रियता बनी हुई है, लेकिन पार्टी ने इसके लिए अलग रणनीति तैयार की है।
सोनम वांगचुक के आंदोलन को अब तक कई विपक्षी नेताओं का समर्थन मिल चुका है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं ने आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है। ऐसे माहौल में राहुल गांधी की अनुपस्थिति विपक्षी राजनीति के भीतर भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
कांग्रेस के अनुसार राहुल गांधी 17 जुलाई को देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत एक बड़ा कार्यक्रम करने वाले हैं। इस अभियान की शुरुआत 17 जून को राजस्थान के कोटा से हुई थी। अभियान का मुख्य फोकस पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर केंद्रित है। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी इन मुद्दों को लेकर देशभर में अलग अभियान चला रहे हैं।
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि विपक्ष के बड़े नेता जनहित से जुड़े ऐसे मुद्दों पर भी सामने नहीं आते हैं तो जनता इसे पसंद नहीं करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह की दूरी राजनीतिक रूप से अच्छा संदेश नहीं देती।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस पूरे विवाद को अलग नजरिए से देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि कौन नेता धरनास्थल पर पहुंचा और कौन नहीं, बल्कि यह है कि प्रधानमंत्री आंदोलनकारियों से बातचीत क्यों नहीं कर रहे और शिक्षा मंत्री अब तक पद पर क्यों बने हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कई विपक्षी नेताओं ने आंदोलन का समर्थन किया है और इसके लिए उन्होंने ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, रोहित पवार तथा शशि थरूर सहित कई नेताओं का सार्वजनिक रूप से आभार भी जताया।
गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी इस आंदोलन की अनदेखी नहीं की। उनके मुताबिक, एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस लगातार पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं और राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान भी उसी लड़ाई का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सोनम वांगचुक का आंदोलन एक-दूसरे के विरोध में नहीं बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।
कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी पहले भी सोनम वांगचुक और लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख चुके हैं। वर्ष 2024 में लद्दाख मार्च के दौरान वांगचुक और अन्य लोगों की हिरासत पर उन्होंने सरकार की आलोचना की थी। वहीं वर्ष 2025 में लद्दाख में हुई हिंसा और वांगचुक पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाए जाने के बाद भी उन्होंने न्यायिक जांच की मांग की थी।
अब राजनीतिक हलकों की नजर दो महत्वपूर्ण तारीखों पर है। 17 जुलाई को राहुल गांधी देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। वहीं CJP ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस इस आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होती है या छात्रों के मुद्दों पर अपने अलग अभियान को ही आगे बढ़ाती है।
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