पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर का दावा है कि विराट कोहली टीम चयन से जुड़े घटनाक्रम और अपने साथ हुए व्यवहार से खुश नहीं थे। हालांकि, कोहली ने अपने संन्यास की वजह सार्वजनिक रूप से इस तरह नहीं बताई है…
नई दिल्ली। विराट कोहली का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास भारतीय क्रिकेट के उन फैसलों में शामिल है, जिसने फैंस को हैरान कर दिया था। 12 मई 2025 को कोहली ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने का ऐलान किया। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर के बयान ने इस फैसले को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। जाफर का मानना है कि विराट कोहली अपने साथ हुए व्यवहार से खुश नहीं थे और वह टेस्ट क्रिकेट में अभी काफी समय तक खेल सकते थे।
वसीम जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस मुद्दे पर बात करते हुए भारतीय टीम की चयन समिति की भूमिका पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, विराट जैसे बड़े खिलाड़ी के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उससे वह निराश हो सकते थे। हालांकि, यह जाफर की राय है। विराट कोहली ने खुद सार्वजनिक तौर पर यह नहीं कहा है कि उन्होंने चयन समिति से नाराजगी के कारण टेस्ट क्रिकेट छोड़ा था।
वसीम जाफर ने चयन समिति पर क्यों उठाए सवाल?
विराट कोहली के संन्यास से पहले उनके टेस्ट क्रिकेट में भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। वह इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे और उनकी लाल गेंद से अभ्यास करने की कुछ वीडियो भी सामने आई थीं। ऐसे में उनके अचानक संन्यास के फैसले ने क्रिकेट जगत को चौंका दिया था।
वसीम जाफर ने कहा कि विराट कोहली जैसे खिलाड़ी दर्शकों को स्टेडियम तक खींचने की क्षमता रखते हैं। उनकी फैन फॉलोइंग और टेस्ट क्रिकेट में योगदान को देखते हुए वह अभी इस प्रारूप में काफी क्रिकेट खेल सकते थे।
जाफर ने यह भी कहा कि जब तक विराट खुद अपने फैसले के पीछे की वजह नहीं बताते, तब तक यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास क्यों लिया। इसके बावजूद उनके बयान ने चयन समिति के फैसलों और विराट के भविष्य को लेकर बहस फिर शुरू कर दी है।
खराब फॉर्म भी बनी थी विराट के सामने चुनौती
विराट कोहली के टेस्ट संन्यास के समय उनकी बल्लेबाजी फॉर्म भी चर्चा का विषय थी। टेस्ट क्रिकेट में उनके पिछले प्रदर्शन में निरंतरता की कमी दिखाई दे रही थी। पिछली सात पारियों में उनका सर्वोच्च स्कोर 36 रन था और इन पारियों में उन्होंने कुल 85 रन बनाए थे।
इसके अलावा, पिछली 13 टेस्ट पारियों में वह केवल एक बार अर्धशतक लगा सके थे। आंकड़े बताते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में उनके लिए रन बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया था। ऐसे में खराब फॉर्म को भी उनके करियर के इस बड़े फैसले से जोड़कर देखा गया।
हालांकि, किसी खिलाड़ी की खराब फॉर्म और उसके संन्यास के बीच सीधा संबंध मान लेना सही नहीं होगा। विराट ने अपने आधिकारिक संन्यास संदेश में अपने टेस्ट करियर के अनुभवों और इस प्रारूप से मिले सम्मान को याद किया था।
वनडे में विराट का प्रदर्शन दिखाता है अलग तस्वीर
टेस्ट क्रिकेट से विदाई लेने के बाद विराट कोहली का सीमित ओवरों के क्रिकेट में प्रदर्शन भी चर्चा में रहा है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में नौ वनडे पारियों में उन्होंने 69 के औसत से 552 रन बनाए। यह प्रदर्शन बताता है कि टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष के बावजूद उनके बल्लेबाजी कौशल और एकदिवसीय प्रारूप में प्रभाव को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है।
विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट में 123 मुकाबले खेले और 9,230 रन बनाए। वह भारत के लिए इस प्रारूप में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में तीसरे स्थान पर रहे। वह 10,000 टेस्ट रन पूरे करने से 770 रन दूर थे।
उनके संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट ने एक ऐसे बल्लेबाज को टेस्ट प्रारूप से विदा होते देखा, जिसने कप्तान और खिलाड़ी दोनों के रूप में टीम पर गहरी छाप छोड़ी।
क्या विराट कोहली की टेस्ट क्रिकेट में वापसी संभव है?
फिलहाल विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट में वापसी का कोई आधिकारिक संकेत नहीं है। वसीम जाफर के बयान ने संन्यास के पीछे की परिस्थितियों पर चर्चा जरूर बढ़ाई है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि विराट ने दबाव में आकर फैसला लिया था।
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यही है कि कोहली ने स्वयं अपने संन्यास को चयन समिति से नाराजगी का परिणाम नहीं बताया है। जब तक उनकी ओर से ऐसी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आती, तब तक जाफर के बयान को उनकी व्यक्तिगत राय के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।