बीते कुछ दिनों से राहुल गांधी और विपक्ष लगातार मोदी सरकार पर हमलावर रहे हैं। ट्रंप के साथ हुए समझौते से लेकर एपस्टीन जैसे गंभीर मुद्दों तक, विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। इस दौरान सियासी माहौल काफी गरमाया रहा।
इतना ही नहीं, विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी दे दिया। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव के समर्थन में 118 सांसदों के हस्ताक्षर भी जुटाए गए। इन घटनाक्रमों ने सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया था।
इसी बीच राहुल गांधी के भाषण को लेकर सरकार ने पहले कड़ा रुख अपनाया और उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की तैयारी की। लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। सरकार ने फिलहाल विशेषाधिकार प्रस्ताव न लाने का फैसला किया है, जिसे सियासी हलकों में बड़े यू-टर्न के तौर पर देखा जा रहा है।
अब सवाल उठ रहा है क्या यह रणनीतिक नरमी है या बढ़ते दबाव के बीच लिया गया संतुलन का फैसला?लोकसभा में इन दिनों बजट सत्र के दौरान जबरदस्त हंगामा देखने को मिल रहा है।
सत्र की शुरुआत से ही जारी गतिरोध अब भी थमता नजर नहीं आ रहा। बुधवार को राहुल गांधी के भाषण के बाद सियासी माहौल और गरमा गया था। स्थिति ऐसी बन गई थी कि सरकार उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की तैयारी में दिख रही थी।
हालांकि गुरुवार को अचानक घटनाक्रम बदल गया और सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के भाषण को लेकर अब विशेषाधिकार हनन का नोटिस नहीं लाया जाएगा।
इसके बावजूद बीजेपी राहुल गांधी के बयान को लेकर हमलावर बनी हुई है। बीजेपी के चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने राहुल गांधी के भाषण से कथित आपत्तिजनक अंश हटाने के लिए औपचारिक नोटिस जारी किया है।
लोकसभा सचिवालय ने बुधवार देर रात राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को कार्यवाही से हटा भी दिया था, लेकिन बीजेपी का मानना है कि यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।
सवाल अब यह है कि सरकार का यह फैसला टकराव से बचने की रणनीति है या सियासी सुलह का संकेत?
पूरा विवाद राहुल गांधी के 11 फरवरी को संसद में दिए गए भाषण के बाद शुरू हुआ। बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान राहुल ने मोदी सरकार पर अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता एकतरफा है और इससे भारत के किसानों, उद्योग और ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ेगा। राहुल ने यहां तक कह दिया कि “आपने भारत को बेच दिया” और सरकार पर किसानों को खतरे में डालने का आरोप लगाया।
राहुल के भाषण के बाद बीजेपी ने पलटवार किया। निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम कर रहे हैं और संसद में बेबुनियाद बयान देकर देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विशेषाधिकार प्रस्ताव नहीं बल्कि एक ठोस प्रस्ताव है, जिस पर चर्चा के बाद सदस्यता रद्द करने की मांग की जाएगी।
संसद में इस मुद्दे पर हंगामा भी हुआ। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल के बयानों को निराधार बताया, वहीं कांग्रेस ने इसे तथ्य आधारित और सरकार की नीतियों पर सीधा सवाल कहा। सोशल मीडिया पर भी राहुल का भाषण तेजी से वायरल हो रहा है, जहां समर्थक उन्हें किसानों और राष्ट्रीय हित के मुद्दे उठाने के लिए सराह रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि यह मोशन चर्चा तक पहुंचता है या नहीं, और अगर पहुंचता है तो आगे की संवैधानिक प्रक्रिया क्या मोड़ लेती है। फिलहाल इतना तय है कि बजट सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने वाला है।