नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर सोमवार को करीब 100 पुलिसकर्मियों के विरोध प्रदर्शन ने सबका ध्यान खींचा। पुलिसकर्मी अपने ही विभाग के अधिकारियों के तबादले के विरोध में सड़क पर उतरे थे। इस पूरे विवाद की शुरुआत उत्तर-पूर्वी दिल्ली के रोहताश नगर इलाके में पार्किंग को लेकर हुए एक झगड़े से हुई थी। मामला इतना बढ़ा कि इसमें वकीलों के एक समूह, एक सैलून संचालक परिवार और पुलिस अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। कार्रवाई के बाद गांधी नगर सब-डिवीजन के एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और गांधी नगर थाने के एसएचओ का तबादला कर दिया गया था।
इस मामले में सैलून संचालक परिवार ने पुलिस पर शिकायत दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया है। वहीं, परिवार का दावा है कि संबंधित अधिकारियों ने उनकी सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप किया था। इसी कार्रवाई के विरोध में पुलिसकर्मी अधिकारियों के समर्थन में मुख्यालय के बाहर जुटे।
मोटरसाइकिल से रास्ता रोकने पर शुरू हुआ विवाद
घटना 23 अक्टूबर की है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के रोहताश नगर इलाके में एक मोटरसाइकिल सैलून के रास्ते में खड़ी थी। सैलून की मालकिन शीतल ठाकुर और उनके पति राहुल ठाकुर ने बाइक खड़ी करने वाले व्यक्ति से उसे हटाने के लिए कहा। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
शीतल की बहन श्वेता भारती के मुताबिक, बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया। उन्होंने दावा किया कि बाइक हटाने के लिए कहने पर सामने वाले व्यक्ति ने जवाब दिया, ‘यह तुम्हारे बाप की सड़क नहीं है।’
श्वेता का आरोप है कि सुबह करीब 11 बजे हुई इस बहस के बाद शाम लगभग 4:30 बजे वकीलों का एक समूह सैलून पहुंचा। परिवार के मुताबिक, वहां तोड़फोड़ की गई और आठ महीने की गर्भवती शीतल के साथ मारपीट भी की गई।
पुलिस स्टेशन में भी मारपीट का आरोप, FIR दर्ज नहीं होने का दावा
घटना के बाद परिवार ने पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया और शिकायत दर्ज कराने के लिए शाहदरा पुलिस स्टेशन पहुंचा। श्वेता का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बजाय उनसे लिखित शिकायत देने को कहा गया, जिसे उन्होंने पुलिस को सौंप दिया।
श्वेता के मुताबिक, इसी दौरान दो वकील पुलिस स्टेशन के अंदर पहुंचे और उनके पति तथा देवर राहुल के साथ मारपीट करने लगे। उन्होंने दावा किया कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन दोनों लोग मारपीट करते रहे।
परिवार का आरोप है कि वकीलों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया, जबकि उनकी शिकायत पर एफआईआर नहीं लिखी गई। हालांकि, इस संबंध में परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने नहीं आया है।
अगले दिन थाने पहुंचे तो वकीलों की भीड़ देखकर लौटे
श्वेता ने बताया कि बाद में जांच अधिकारी ने उनके पति और देवर राहुल को पुलिस स्टेशन बुलाया था। अगले दिन जब वे दोनों थाने पहुंचे तो वहां वकीलों की बड़ी संख्या में मौजूदगी थी। श्वेता का दावा है कि यह वही समूह था, जिसने बाद में एसीपी और एसएचओ के साथ भी बदसलूकी की।
परिवार की दोनों बहनों के मुताबिक, उनके पति और देवर वहां से चले गए और उसके बाद घर नहीं लौटे। परिवार का कहना है कि वे उनसे संपर्क भी नहीं कर पा रहे हैं।
इसके बाद बहनों ने डीसीपी और एसएचओ समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया। उन्होंने मामले में कार्रवाई करने और पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की। रिपोर्ट के मुताबिक, शाहदरा के डीसीपी आरपी मीणा ने इस मामले पर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
पुलिस अधिकारियों के समर्थन में मुख्यालय पहुंचीं शीतल और श्वेता
सोमवार को जब शीतल और श्वेता को पुलिस मुख्यालय के बाहर जवानों के प्रदर्शन की जानकारी मिली तो वे भी वहां पहुंच गईं। दोनों ने कहा कि वे एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ के समर्थन में आई हैं। उनका दावा है कि इन अधिकारियों ने उनके परिवार की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप किया था।
शीतल ने मांग की कि पुलिस स्टेशन के संबंधित सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त कर उसकी निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने कहा कि फुटेज सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि थाने के अंदर वास्तव में क्या हुआ था।
इस तरह एक पार्किंग विवाद से शुरू हुआ मामला पुलिस स्टेशन में कथित मारपीट, शिकायत दर्ज कराने को लेकर उठे सवाल और वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले तक पहुंच गया। अब इस पूरे घटनाक्रम में सीसीटीवी फुटेज और जांच की भूमिका अहम मानी जा रही है।