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6 साल में 744 हाथियों की मौत का गुनहगार कौन? केरल के जंगल बने ‘डेथ ज़ोन’,रिपोर्ट्स ने चौकाया

केरल के घने और खूबसूरत जंगल इन दिनों हाथियों के लिए ‘डेथ ज़ोन’ बन चुके हैं। हाल ही में एरनाकुलम जिले के मलयाट्टूर वन क्षेत्र में एक और बिना दांत वाले नर हाथी की दर्दनाक मौत ने वाइल्डलाइफ लवर्स और प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि हाथी की मौत ‘सेप्टीसीमिया’ “खून में फैले इन्फेक्शन” की वजह से हुई है और आशंका यह भी है कि जंगली सूअरों को मारने के लिए बिछाए गए किसी बारूदी फल को इस हाथी ने चबा लिया था, जिससे उसका मुंह पूरी तरह फट गया और वो कई दिनों तक भूखा-प्यासा तड़पता रहा।

परम्बिकुलम से मुन्नार तक फैला ‘मौत का गलियारा’

वन विभाग के आंकड़े और विशेषज्ञों की स्टडी एक खौफनाक हकीकत बयां करती है। केरल का परम्बिकुलम-मुन्नार-मलयाट्टूर बेल्ट अब हाथियों के लिए सबसे खतरनाक इलाका बन चुका है। अकेले पिछले दो महीनों में इस क्षेत्र से दिल दहला देने वाली कई घटनाएं सामने आई हैं:

मई में कुट्टमपुझा के जंगलों में विस्फोटक से भरा कटहल चबाने के कारण एक हाथी ने दम तोड़ दिया।

जून में नेरियमंगलम रेंज में खेतों के अवैध बाड़ों में दौड़ रहे करंट की चपेट में आने से एक हाथी की मौत हो गई। यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जो याद दिलाता है साल 2020 की उस दर्दनाक घटना की, जब साइलेंट वैली में एक गर्भवती हथिनी पटाखा भरा फल खाने के बाद नदी में खड़े-खड़े मर गई थी।

आंकड़ों में छिपी भयावहता

केरल के पूर्व मुख्य वन्यजीव वार्डन प्रमोद जी. कृष्णन के नेतृत्व में की गई एक हालिया स्टडी के मुताबिक, साल 2019 से 2025 के बीच केरल में 744 हाथियों की मौत हुई है। इनमें से 77 मौतें पूरी तरह से ‘अप्राकृतिक’ थीं, यानी उनके पीछे इंसानी हाथ था।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि हाथियों के लिए सबसे बड़ा काल अवैध बिजली के तार बन रहे हैं, जिनकी संख्या पिछले 6 सालों में तीन गुना बढ़ गई है। किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों के चारों ओर हाई-वोल्टेज तार लगा देते हैं, जिसकी चपेट में आकर ये विशालकाय जीव तड़प-तड़प कर मर जाते हैं।

क्या कर रहा है प्रशासन?

इस ताज़ा मामले के बाद केरल के वन मंत्री और मुख्य वन्यजीव वार्डन ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। सरकार का कहना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए कुछ शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म प्लान बनाए जा रहे हैं।

news desk

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