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‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शहीदों के नाम एक साल बाद सामने आने पर, विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए पूछे सवाल- आखिर सच क्यों छिपाया?

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बलिदान देने वाले भारत के 6 वीर जवानों के नाम एक साल बाद जब आधिकारिक तौर पर सामने आए, तो देश की सियासत में एक नया उबाल आ गया है। इस सूची के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार ने एक साल से अधिक समय तक देश और संसद से अपने सैनिकों की शहादत और नुकसान की वास्तविक जानकारी छिपाकर रखी।

कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुराने बयानों को ‘चुनावी राष्ट्रवाद’ और ‘सच्चाई से भागने की कोशिश’ करार दिया है।

“एक साल तक शहादत क्यों छिपाई?”

नेशनल वॉर मेमोरियल के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में शहीदों के नाम दर्ज होने के बाद विपक्षी खेमे ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने पूछा है कि अगर यह ऑपरेशन पिछले साल मई में हुआ था, तो इन 6 वीर जवानों के नाम देश के सामने तुरंत क्यों नहीं रखे गए, क्या सरकार हेडलाइंस को कंट्रोल करने और अपने राजनीतिक नुकसान को बचाने के लिए जवानों की शहादत को छिपा रही थी?

विपक्ष का कहना है कि संसद के भीतर जब भी ऑपरेशन सिंदूर में हुए भारत के वास्तविक नुकसान को लेकर सवाल पूछे गए, तो सरकार ने हमेशा उन सवालों को ‘सेना के मनोबल’ का हवाला देकर दबा दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार पारदर्शी होने के बजाय सच को दबाने की नीति पर चल रही है।

रक्षा मंत्री के बयान को विपक्ष ने बताया ‘सियासी ढाल’

सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का जो बयान इस समय ट्रेंड कर रहा है, उसे लेकर विपक्ष ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार और रक्षा मंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए इसे संसद को गुमराह करने का गंभीर मामला बताया है। पवन खेड़ा ने त्वीट कर कहा की:

“सिर्फ़ दो ही संभावनाएँ हैं। या तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जब संसद को संबोधित किया तो उनको यह जानकारी ही नहीं थी कि छह सैनिक शहीद हो चुके थे। यदि ऐसा है, तो यह उस मंत्री पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, जिसे उसी मंत्रालय के मामलों की जानकारी नहीं है जिसका वह नेतृत्व कर रहे हैं। या फिर उन्हें सच्चाई मालूम थी और इसके बावजूद उन्होंने संसद को गुमराह करना चुना। यह उससे भी अधिक गंभीर है, क्योंकि इससे यह सिद्ध होता है कि यह सरकार लोकतंत्र के मंदिर में, शपथ के साथ, देश से झूठ बोलती है।”

खेड़ा ने आगे कहा कि जो भी सच हो, कुछ तथ्य नहीं बदलते। हमारे छह वीर जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन उनके बलिदान को छिपाया गया। उन्हें वह सम्मान और मर्यादा नहीं दी गई जिसके वे हक़दार थे, और उनके परिवारों के साथ भी यह परदादारी की गई। यह हमारे सैनिकों का अपमान है, और कोई भी सच्चा देशभक्त इस पर मौन या संतुष्ट नहीं रह सकता।

news desk

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