पटना। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को लेकर चल रही सियासी खींचतान के बीच पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में एक बहुत बड़ा प्रशासनिक भूचाल आ गया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के औचक निरीक्षण और कड़े रुख के बाद PMCH के प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप को उनके पद से हटा दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से ही सूबे का चिकित्सा और राजनीतिक गलियारा गरमा गया है, और अब इस मामले ने एक बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया है।
पद से हटाए जाने के बाद अपने बचाव में आए डॉ. नरेंद्र प्रताप ने सरकार की इस कार्रवाई को बेहद अपमानजनक बताया है। उन्होंने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया:
“इस फैसले से मेरी गरिमा को गहरी ठेस पहुंची है। एक डॉक्टर और पदाधिकारी के तौर पर समाज में मेरा एक सम्मानित स्थान है, पूरी दुनिया मुझे जानती है। इस तरह अचानक हटाए जाने के बाद मेरा मन कहता है कि मैं आत्महत्या कर लूं।”
डॉ. नरेंद्र ने याद दिलाया कि उनके साथ ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा:
“2018-2019 में भी इसी सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के समय अधिकारी संजय कुमार ने मुझे सस्पेंड किया था। तब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने महज तीन हफ्ते के भीतर उस कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण (Mala fide) करार दिया था और छात्रों ने मेरे समर्थन में सड़कों पर मार्च किया था।”
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद बिहार के डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव सरकार और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के बचाव में उतर आए हैं। जेडीयू (JD-U) मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए डिप्टी सीएम ने साफ शब्दों में कहा:
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार PMCH में रेडियोलॉजिस्ट डिपार्टमेंट का उद्घाटन करने पहुंचे थे।
प्रशासनिक लापरवाही और अनुशासनहीनता के इस रवैये से नाराज होकर स्वास्थ्य मंत्री ने तुरंत कड़े एक्शन के निर्देश दिए और कहा कि इनके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिसके बाद डॉ. नरेंद्र को पदमुक्त कर दिया गया।
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