नई दिल्ली: जिंदगी और मौत के बीच के अनुभवों को लेकर अक्सर ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। अमेरिका की रहने वाली वानिया वाल्ट्रियानी का ऐसा ही एक अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा में है। ब्रेन ब्लीड के बाद वह तीन दिन तक कोमा में रहीं। होश में आने के बाद उन्होंने दावा किया कि इस दौरान उन्होंने खुद को शरीर से बाहर देखा और एक ऐसी जगह पहुंचीं, जहां उनकी मुलाकात 16 साल पहले गुजर चुके पिता से हुई। वानिया के मुताबिक, उनके पिता वहां बूढ़े नहीं बल्कि बिल्कुल जवान नजर आ रहे थे।
मिरर यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 में 45 साल की वानिया एक पार्टी में डांस कर रही थीं। इसी दौरान अचानक उनके सिर में तेज दर्द उठा। उन्होंने इस दर्द को बेहद तेज और किसी जोरदार चोट जैसा बताया।
जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि उनके दिमाग की एक नस फट गई थी। हालत गंभीर थी और डॉक्टरों ने परिवार को उनके बचने की संभावना बेहद कम होने की जानकारी दी। इसके बाद वानिया करीब तीन दिनों तक गहरे कोमा में रहीं।
वानिया ने अपने अनुभव के बारे में बताते हुए दावा किया कि जब डॉक्टर आईसीयू में उनका इलाज कर रहे थे, उस दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उनकी चेतना शरीर से बाहर निकल गई हो। उन्होंने खुद को अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए देखने की बात कही।
इसके बाद उनके मुताबिक वह एक बेहद शांत और खूबसूरत जगह पर पहुंचीं। वहां उन्हें न तो दर्द महसूस हो रहा था और न ही डर। इसी दौरान उन्होंने अपने पिता को देखा, जिनका निधन 16 साल पहले हो चुका था।
वानिया के अनुसार, उनके पिता वहां उम्रदराज नहीं बल्कि जवान दिखाई दे रहे थे और उनके चारों ओर चमकती हुई रोशनी थी।
वानिया का दावा है कि उनके पिता ने उन्हें गले लगाया। उन्होंने शब्दों में कुछ नहीं कहा, बल्कि उन्हें ऐसा संदेश महसूस हुआ कि घबराने की जरूरत नहीं है और सब ठीक हो जाएगा।
उनके मुताबिक, इस अनुभव के दौरान उन्हें यह एहसास हुआ कि मौत किसी कहानी का अंत नहीं है और वास्तव में मौत जैसी कोई चीज नहीं होती। वानिया ने बताया कि वह उस जगह से वापस नहीं लौटना चाहती थीं, लेकिन अचानक उन्हें अपने शरीर में लौटने का अनुभव हुआ और इसके बाद वह दर्द के साथ होश में आ गईं।
करीब तीन दिन बाद जब वानिया कोमा से बाहर आईं तो उन्होंने अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि होश में आने के बाद वह अपनी मातृभाषा पुर्तगाली पूरी तरह भूल चुकी थीं और उन्हें केवल अंग्रेजी याद थी।
वानिया का यह अनुभव नियर डेथ एक्सपीरियंस के तौर पर चर्चा में है। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए परलोक के अनुभव और मौत से जुड़े दावे उनके व्यक्तिगत अनुभव हैं; इन्हें वैज्ञानिक रूप से मृत्यु के बाद जीवन के प्रमाण के तौर पर स्थापित नहीं किया गया है।
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