भारत में एक समय ऐसा भी था जब पुलिस की वर्दी को केवल पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। महिलाओं के लिए इस सर्विस में जाना किसी सपने से कम नहीं था, लेकिन एक महिला ने इस सोच को बदलकर इतिहास रच दिया। वो महिला थीं किरण बेदी, किरण बेदी का जन्म 9 जून 1949 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रकाश लाल पेशावरिया और मां का नाम प्रेमलता था। किरण की चार बहनें भी हैं। किरण को बचपन में “किमी” के नाम से भी जाना जाता था। उनका परिवार पेशावर का रहने वाला था, लेकिन 1860 में उनके परदादा लाला हरगोबिंद पेशावरिया पेशावर से अमृतसर आ गए थे और जलियांवाला बाग के पास उनका बचपन बीता।
बचपन से ही किरण में एक जुनून था,देश के लिए और बेटियों के लिए कुछ करने का। एक बार किरण एक रिश्तेदार की बेटी की शादी में गई थीं, जहां लड़की को दिए जाने वाले दहेज को देखकर वह बिना कुछ खाए-पिए वापस लौट आईं। उन्होंने ठान लिया कि दहेज के खिलाफ लोगों को जागरूक करेंगी। स्कूल के समय में भी उनकी बहन से किसी ने छेड़छाड़ की तो किरण ने बीच बाजार उसकी पिटाई कर दी थी। यहीं से उन्होंने लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास करना शुरू कर दिया था।
आज उनके जन्मदिन के अवसर पर देश उनकी उपलब्धियों और योगदान दोनों को याद कर रहा है।
किरण बेदी बचपन से ही बेहद प्रतिभाशाली थीं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें खेलों में भी काफी रुचि थी। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर टेनिस खेला और कई प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की। उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यही कारण था कि उन्होंने समाज की सोच को चुनौती देते हुए भारतीय पुलिस सेवा में जाने का फैसला किया।
साल 1972 में किरण बेदी भारतीय पुलिस सेवा “IPS” में चयनित हुईं और देश की पहली महिला IPS अधिकारी बन गईं। यह उपलब्धि केवल उनके लिए नहीं बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी। पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने दिल्ली, गोवा, मिजोरम और चंडीगढ़ समेत कई स्थानों पर अपनी सेवाएं दीं।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस में तैनाती के दौरान उन्होंने यातायात नियमों का सख्ती से पालन करवाया। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में उन्होंने कभी किसी का पद या प्रभाव नहीं देखा। इसी कारण उन्हें “क्रेन बेदी” के नाम से भी जाना जाने लगा।
हालांकि किरण बेदी को सबसे अधिक पहचान तिहाड़ जेल में किए गए सुधारों के कारण मिली। 1990 के दशक में जब उन्हें तिहाड़ जेल का महानिरीक्षक बनाया गया, तब जेल की स्थिति काफी खराब थी। उन्होंने वहां शिक्षा, योग, ध्यान, व्यावसायिक प्रशिक्षण और नशामुक्ति जैसे कई कार्यक्रम शुरू किए। इन सुधारों का असर यह हुआ कि तिहाड़ जेल की तस्वीर बदलने लगी और दुनिया भर में उनके काम की सराहना हुई।
अपने 35 वर्षों से अधिक लंबे पुलिस करियर में उन्होंने कई संवेदनशील मामलों और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना किया। हालांकि उनके द्वारा सुलझाए गए मामलों की कोई आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और पुलिस सुधार के क्षेत्र में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
किरण बेदी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। साल 1994 में उन्हें प्रतिष्ठित रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक (1979), अंतरराष्ट्रीय महिला पुरस्कार (1992), एशिया रीजन अवार्ड (1991), संयुक्त राष्ट्र पदक (2004), मदर टेरेसा मेमोरियल नेशनल अवार्ड (2005), कुमारप्पा-रेकलेस अवार्ड (2008) और IIT दिल्ली डिस्टिंग्विश्ड एलुमनाई अवार्ड (2010) जैसे सम्मान भी प्राप्त हुए।
बाद में उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई और वर्ष 2016 में पुडुचेरी की उपराज्यपाल नियुक्त की गईं।
आज 77वें जन्मदिन पर किरण बेदी केवल एक पूर्व पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि साहस, ईमानदारी और महिला सशक्तिकरण की मिसाल के रूप में याद की जाती हैं। उनका जीवन बताता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी बाधा सफलता के रास्ते में नहीं आ सकती |
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