तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अंतिम विदाई के दौरान उमड़ी भीड़ को केवल शोक का प्रतीक नहीं, बल्कि अमेरिका और इजराइल के प्रति गुस्से और संभावित जवाबी कार्रवाई की भावना के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि अंतिम संस्कार के बाद ईरान की अगली रणनीति क्या होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। माहौल पूरी तरह भावुक दिखाई दिया, लेकिन इसके साथ ही भीड़ में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नाराजगी भी साफ नजर आई। कई लोगों ने इसे केवल विदाई नहीं, बल्कि प्रतिरोध के संकल्प का प्रदर्शन बताया।
अंतिम दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग लाल झंडे लेकर पहुंचे। युद्ध में घायल सैनिक, उनके परिजन, महिलाएं और बच्चे भी इस मौके पर मौजूद रहे। रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानों पर अमेरिका विरोधी नारे भी सुनाई दिए, जिससे यह चर्चा और तेज हो गई कि ईरान के भीतर आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम दर्शन के लिए कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी पहुंचे। इस दौरान एक वरिष्ठ कमांडर ताबूत के सामने भावुक होते नजर आए। पूरे कार्यक्रम के दौरान शोक और आक्रोश दोनों भावनाएं एक साथ दिखाई दीं।
जानकारी के मुताबिक, 4 से 6 जुलाई तक तेहरान में आम लोग अंतिम दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद अंतिम यात्रा विभिन्न धार्मिक स्थलों से होकर आगे बढ़ेगी। 7 जुलाई को कुम में शोक सभा आयोजित होगी। इसके बाद ताबूत को इराक ले जाया जाएगा, जहां 8 जुलाई को नजफ और करबला में श्रद्धांजलि कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। अंत में 9 जुलाई को मशहद में इमाम रजा दरगाह के पास उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
खामेनेई की अंतिम विदाई के बाद यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि ईरान आगे कड़ा रुख अपना सकता है। रिपोर्ट में जिन प्रमुख कारणों का उल्लेख किया गया है, उनमें खामेनेई की हत्या का बदला लेने की भावना, हालिया संघर्ष में तीन हजार से अधिक लोगों की मौत से उपजा आक्रोश, ईरान पर लंबे समय से लगे प्रतिबंध, यूरेनियम संवर्धन पर रोक, मिसाइल कार्यक्रम पर दबाव, होर्मुज क्षेत्र को लेकर विवाद और ऊर्जा क्षेत्र पर हमलों को शामिल किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को बुरी तरह हराया है और समझौते के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। उनके इस बयान के बाद भी ईरान के भीतर राजनीतिक और जनभावनाओं को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने यह संकेत दिया है कि ईरान के भीतर बड़ी संख्या में लोग अपने नेतृत्व के समर्थन में एकजुट दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, आगे ईरान क्या कदम उठाएगा, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कोई घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में दुनिया की नजर अब तेहरान की आगामी रणनीति पर टिकी हुई है।
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