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19 अगस्त 2026 पंचांग: शीतला सप्तमी और तुलसीदास जयंती का शुभ संयोग, जानें पूजा मुहूर्त और राहुकाल का समय

नई दिल्ली: 19 अगस्त 2026, बुधवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस दिन श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। इसी तिथि पर शीतला सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। साथ ही महान संत और रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती भी मनाई जाएगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन ब्रह्म योग और विशाखा नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं 19 अगस्त का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।

19 अगस्त 2026 का पंचांग

श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 19 अगस्त को शाम 7 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। इस दिन ब्रह्म योग देर रात 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। वहीं विशाखा नक्षत्र पूरे दिन और रात रहने के बाद 20 अगस्त की सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगा।

इस दिन शीतला सप्तमी और गोस्वामी तुलसीदास जयंती का विशेष महत्व रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा-पाठ और शुभ कार्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

19 अगस्त 2026 के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:25 बजे से 5:09 बजे तक

प्रातः संध्या: सुबह 4:47 बजे से 5:52 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: नहीं है

विजय मुहूर्त: दोपहर 2:35 बजे से 3:28 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:57 बजे से 7:19 बजे तक

सायाह्न संध्या: शाम 6:57 बजे से रात 8:02 बजे तक

अमृत काल: रात 11:28 बजे से 20 अगस्त की रात 1:13 बजे तक

19 अगस्त 2026 को इन शहरों में रहेगा राहुकाल

दिल्ली: दोपहर 12:24 बजे से 2:03 बजे तक

मुंबई: दोपहर 12:42 बजे से 2:17 बजे तक

चंडीगढ़: दोपहर 12:26 बजे से 2:05 बजे तक

लखनऊ: दोपहर 12:10 बजे से 1:47 बजे तक

भोपाल: दोपहर 12:24 बजे से 2:00 बजे तक

कोलकाता: सुबह 11:40 बजे से दोपहर 1:16 बजे तक

अहमदाबाद: दोपहर 12:43 बजे से 2:19 बजे तक

चेन्नई: दोपहर 12:12 बजे से 1:46 बजे तक

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय: सुबह 5:52 बजे

सूर्यास्त: शाम 6:57 बजे

ब्रह्म योग और विशाखा नक्षत्र का महत्व

19 अगस्त को ब्रह्म योग और विशाखा नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

विशाखा नक्षत्र को उपलब्धि, समृद्धि और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति माने जाते हैं। विशाखा नक्षत्र के तीन चरण तुला राशि में और चौथा चरण वृश्चिक राशि में आता है।

मान्यता है कि इस नक्षत्र में रचनात्मक कार्य, कला, चित्रकारी और औषधि से जुड़े कार्य शुरू करना शुभ माना जाता है।

vineet verma

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