नई दिल्ली: 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के मौके पर गणपति बप्पा को श्रद्धा और भक्ति के साथ विदाई दी जाएगी। घर में पूजा के बाद प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है। इस दौरान भीड़, जल्दबाजी या पानी के तेज बहाव की वजह से कई बार मूर्ति का कोई हिस्सा टूट जाता है। ऐसी स्थिति में भक्तों को अनहोनी या किसी दोष की चिंता होने लगती है। धर्माचार्यों के बताए अनुसार, ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सम्मानपूर्वक विसर्जन की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
मूर्ति खंडित हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं
कई स्थानों पर यह मान्यता है कि देवी-देवताओं की मूर्ति खंडित होने पर इसे अशुभ संकेत या दोष से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, विसर्जन के दौरान भीड़, जल्दबाजी या अन्य परिस्थितियों के कारण प्रतिमा का टूट जाना अनजाने में हो सकता है। ऐसी स्थिति में परेशान होने के बजाय गणपति बप्पा का स्मरण कर उचित तरीके से विसर्जन करना चाहिए।
गणपति की मूर्ति टूट जाए तो क्या करें?
सबसे पहले गणपति बप्पा का स्मरण करते हुए उनसे क्षमा मांगें। इसके बाद प्रतिमा के टूटे हुए सभी हिस्सों को एकत्र करें और उन्हें सम्मानपूर्वक जल में विसर्जित करें। खंडित हिस्सों को कूड़े में डालने या इधर-उधर फेंकने से बचना चाहिए।
अगर विसर्जन से पहले होने वाली आरती से पहले ही मूर्ति खंडित हो जाए तो गणपति बप्पा से क्षमा मांगकर उनके सामने दीपक जलाएं और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद प्रतिमा के सभी हिस्सों को सम्मानपूर्वक विसर्जित करने की बात कही गई है। ऐसी स्थिति में आचार्य या पंडित से सलाह भी ली जा सकती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अगर प्रतिमा खंडित होने के बाद भी पूरे सम्मान के साथ उसका विसर्जन किया जाए और सच्चे मन से गणपति बप्पा से क्षमा मांगी जाए तो पूजा का फल प्राप्त होता है। इसलिए इसे लेकर मन में किसी तरह की आशंका रखने की जरूरत नहीं बताई गई है। हालांकि, खंडित प्रतिमा को वापस घर लाकर उसकी दोबारा पूजा नहीं करनी चाहिए।
घर पर ही मूर्ति खंडित हो जाए तो क्या करें?
अगर विसर्जन से पहले घर में ही गणपति की प्रतिमा किसी वजह से खंडित हो जाए तो सबसे पहले हाथ जोड़कर गणेश जी से क्षमा मांगें। इसके बाद खंडित प्रतिमा को सम्मानपूर्वक पूजा स्थल से हटाकर विसर्जन के लिए ले जाएं। विसर्जन के दौरान फूल, नारियल आदि अर्पित करके प्रतिमा को सम्मान के साथ विदाई देने की बात कही गई है।
इसके पीछे धार्मिक मान्यता यह है कि जिस तरह गणपति बप्पा की विधि-विधान से स्थापना करके कई दिनों तक पूजा की जाती है, उसी तरह उनकी विदाई भी श्रद्धा और सम्मान के साथ की जानी चाहिए।
खंडित प्रतिमा की दोबारा पूजा न करने की मान्यता
धर्म-ज्योतिष में सामान्य तौर पर खंडित मूर्ति की पूजा नहीं करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, गणेश उत्सव के दौरान 10 दिन तक स्थापित की गई प्रतिमा के विसर्जन के समय गलती से खंडित होने की स्थिति को अलग संदर्भ में देखा जाता है। ऐसी स्थिति में प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जित करने की बात कही गई है।
अगर किसी अन्य समय भगवान की कोई प्रतिमा गलती से खंडित हो जाए तो उसे सीधे अपशकुन मानने के बजाय भगवान से क्षमा मांगकर सब कुछ मंगलमय होने की प्रार्थना करने की धार्मिक सलाह दी जाती है।
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