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वैक्सीन से Private Part सिकुड़ने का क्या है पूरा सच? जिस अफवाह ने 17 लोगों की ली जान

मौजूदा दौर में सोशल मीडिया पर कौन-सी खबर कब वायरल हो जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इतना ही नहीं, वायरल होने वाली खबरें आग की तरह फैलती हैं और लोग बड़ी आसानी से उन पर विश्वास कर लेते हैं। अक्सर लोग यह नहीं सोचते कि खबर सही है या नहीं, और यही अंधा भरोसा कई बार नुकसानदेह साबित होता है। कई मामलों में वायरल खबरों का सच कुछ और ही निकलता है।

ऐसा ही एक मामला सामने आया है। दरअसल, वैक्सीन से प्राइवेट पार्ट सिकुड़ने की अफवाह के बाद बौखलाई भीड़ ने हेल्थ वर्कर्स पर हमला कर दिया, जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई। जब तक इस अफवाह पर लगाम लगाई जाती, तब तक स्थिति हाथ से निकल चुकी थी। यह मामला डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो का है।

शोपो प्रांत में फैली इस अफवाह में दावा किया गया कि पुरुषों के गुप्तांग सिकुड़कर गायब हो रहे हैं। इस निराधार डर ने लोगों को इतना भयभीत कर दिया कि भीड़ ने स्वास्थ्य कर्मियों को ही निशाना बना लिया। स्थानीय लोगों का मानना था कि वैक्सीन इस कथित “बीमारी” की वजह है।

इन्फोडेमिक से हिंसा तक

हिंसा की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई, जब सोशल मीडिया पर इस कथित बीमारी से जुड़े वीडियो और मैसेज तेजी से वायरल होने लगे। देखते ही देखते यह ‘इन्फोडेमिक’ (गलत सूचनाओं की महामारी) लोगों के मन में गहरे बैठ गया। जब तक प्रशासन और स्वास्थ्य एजेंसियां सक्रिय होतीं, तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे।

6 अक्टूबर को इसांगी क्षेत्र के इलम्बी गांव में टीकाकरण से जुड़ी रिसर्च कर रही एक टीम पर हमला कर दिया गया। हाई-विजिबिलिटी जैकेट और डिजिटल उपकरणों के साथ पहुंचे स्वास्थ्यकर्मियों को ग्रामीणों ने “बीमारी फैलाने वाला” समझ लिया।

हमले में दो डॉक्टरों की मौके पर ही हत्या कर दी गई, जबकि अन्य पर भी जानलेवा हमला हुआ। इसके बाद पास के याफिरा गांव में भी दो स्वास्थ्यकर्मियों को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।

सोशल मीडिया और धार्मिक प्रभाव

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अफवाह को फैलाने में सोशल मीडिया के साथ-साथ कुछ स्थानीय धार्मिक संस्थाओं की भी भूमिका रही। वायरल वीडियो में कथित ‘चमत्कारी इलाज’ और वैक्सीन को लेकर भ्रामक दावे किए गए, जिससे लोगों का डर और बढ़ गया।

विश्वास की कमी बनी बड़ी वजह

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य एजेंसियों के अनुसार, अफ्रीका के कई हिस्सों में आधुनिक चिकित्सा के प्रति अविश्वास पुराना है। औपनिवेशिक दौर और संदिग्ध क्लिनिकल ट्रायल्स की विरासत आज भी लोगों के मन में शंका पैदा करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब लोग स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा नहीं करते, तो वे उन सुविधाओं से दूर हो जाते हैं जो उनकी जान बचा सकती हैं और यही अविश्वास कई बार हिंसा का कारण बन जाता है।

प्रशासन की कार्रवाई और चुनौती

स्थानीय प्रशासन ने अब तक करीब एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया है और अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई शुरू की है। साथ ही रेडियो और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जागरूक करने की कोशिश की जा रही है कि ऐसी कोई बीमारी अस्तित्व में नहीं है।

हालांकि, गलत सूचनाओं पर लगाम लगाने के लिए काम कर रही एजेंसियों को फंड की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है, जिससे इस तरह की घटनाओं को रोकना और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta Platforms (फेसबुक) और TikTok पर ये भ्रामक वीडियो महीनों तक वायरल होते रहे, जिससे लोग गुमराह होते रहे। अब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए करीब एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक व्यक्ति को अफवाह फैलाने के आरोप में जेल भेजा गया है।

क्यों डरते हैं लोग वैक्सीन और हेल्थ वर्कर्स से?

अफ्रीका के कई हिस्सों में आधुनिक चिकित्सा को लेकर अविश्वास काफी पुराना है। इसकी वजह औपनिवेशिक दौर और पश्चिमी देशों के संदिग्ध मेडिकल ट्रायल्स माने जाते हैं।

Africa CDC के महानिदेशक डॉ. जीन कासेया के मुताबिक, जब लोग वैक्सीन और डॉक्टरों पर भरोसा नहीं करते, तो वे इलाज से दूर हो जाते हैं, जिससे उनकी जान को खतरा बढ़ जाता है।

कांगो के अलावा मोजाम्बिक और मलावी में भी गलत सूचनाओं के कारण हेल्थ वर्कर्स पर हमले हो चुके हैं।

news desk

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