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क्या मेसी के कार्यक्रम में सीएम रेखा गुप्ता के सामने लगे ‘एक्यूआई’ के नारे?

अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनल मेसी अपने ‘जोओएटी इंडिया टूर’ के आखिरी चरण में दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम पहुंचे। इस दौरान एक अजीब नजारा देखने को मिला, जब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष रोहन जेटली के साथ मंच पर मौजूद रहीं।

इसी दौरान स्टेडियम में मौजूद लोगों ने दिल्ली की खराब हवा को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे कुछ समय के लिए माहौल असहज हो गया। इस अप्रत्याशित घटना ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा।

इस दौरान AQI-AQI के नारे लगने का दावा भी किया जा रहा है। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है । हालांकि, इस वीडियो की पुष्टि indianpresshouse नहीं करता है।

बता दे कि दिल्ली की हवा एक बार फिर ज़हरीली हो चुकी है और इसी को लेकर राजधानी की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जबरदस्त तरीके से ट्रेंड कर रही हैं। दिल्ली के कई इलाकों में AQI 450 से 500 के पार पहुंच चुका है, जो सीधे ‘सीवियर’ कैटेगरी में आता है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग खुलकर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर मीम्स, वीडियो और हैशटैग्स की बाढ़ आ गई है।

DelhiPollution, #RekhaGupta और #AQI जैसे हैशटैग्स ट्रेंड में हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और समर्थक मुख्यमंत्री पर सीधे-सीधे प्रदूषण रोकने में नाकामी का आरोप लगा रहे हैं। और “AQI 500 पार होने के बाद भी सरकार गंभीर नहीं दिख रही।” कुछ यूजर्स पुराने बयान को लेकर भी तंज कस रहे हैं, जिसमें AQI की तुलना “टेंपरेचर” से की गई थी।

बीजेपी समर्थक जहां इसे पिछली सरकारों की “विरासत में मिली समस्या” बता रहे हैं, वहीं विपक्ष का कहना है कि मौजूदा सरकार ने GRAP नियमों में ढील देकर हालात और बिगाड़ दिए हैं।

संसद में भी गूंजा दिल्ली की ज़हरीली हवा का मुद्दा
सोशल मीडिया के साथ-साथ संसद में भी दिल्ली की हवा पर हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शीतकालीन सत्र में वायु प्रदूषण को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछले छह सालों में हालात सुधरने के बजाय और खराब हुए हैं और इस मुद्दे पर संसद में प्राथमिकता के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। तिवारी ने रूल 193 के तहत नोटिस दिया और यहां तक कहा कि दिल्ली-एनसीआर “लीथल गैस चेंबर” में बदल चुका है।

उन्होंने चेतावनी दी कि प्रदूषण की वजह से लोगों की जीवन प्रत्याशा सात साल तक घट सकती है। डॉक्टरों के हवाले से उन्होंने यह भी बताया कि नॉन-स्मोकर्स में फेफड़ों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

फिलहाल दिल्ली में प्रदूषण को लेकर गुस्सा, राजनीति और चिंता—तीनों चरम पर हैं। आम लोग साफ हवा चाहते हैं, जबकि सियासी दल एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के आसार साफ दिख रहे हैं।

news desk

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