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इराक से खत्म हुआ अमेरिका का 12 साल पुराना सैन्य मिशन, ISIS के खिलाफ ‘ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व’ का औपचारिक अंत

नई दिल्ली। अमेरिका ने इराक में आतंकवादी संगठन ISIS के खिलाफ चलाए जा रहे अपने करीब 12 साल पुराने सैन्य मिशन ‘ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व’ को औपचारिक रूप से खत्म कर दिया है। पेंटागन के मुताबिक, अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की सेनाओं और सैन्य उपकरणों की इराक के एरबिल एयर बेस से वापसी पूरी हो गई है। इसके साथ ही इराक में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन के सैन्य अभियान का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है।

हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका इराक से पूरी तरह बाहर हो गया है। मिशन खत्म होने के बाद भी दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग, सीमित सैन्य प्रशिक्षण और खुफिया साझेदारी जारी रहने की बात कही गई है।

2014 में ISIS के खिलाफ शुरू हुआ था अभियान

‘ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व’ की शुरुआत 2014 में हुई थी। उस समय ISIS ने इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था और क्षेत्र में एक बड़े सैन्य संगठन के तौर पर उभर रहा था।

अमेरिका के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने ISIS के खिलाफ अभियान में इराकी सुरक्षा बलों को हवाई सहायता, प्रशिक्षण और खुफिया सहयोग उपलब्ध कराया। अभियान के दौरान ISIS ने इराक में अपने कब्जे वाले अधिकांश क्षेत्र गंवा दिए और उसकी संगठित सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा।

हालांकि, संगठन के बचे हुए नेटवर्क के खिलाफ आतंकवाद विरोधी अभियान इसके बाद भी जारी रहा।

एरबिल से सैनिकों और सैन्य उपकरणों की वापसी पूरी

पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल के मुताबिक, गठबंधन सेना और उसके सैन्य उपकरणों की एरबिल एयर बेस से वापसी मिशन के औपचारिक समापन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अब इराक में सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी वहां की सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय बलों की होगी। इनमें इराकी सुरक्षा बलों के साथ कुर्द पेशमर्गा बल भी शामिल हैं।

अमेरिका का कहना है कि वह जरूरत के मुताबिक अपने इराकी साझेदारों को लक्षित प्रशिक्षण और खुफिया सहयोग देता रहेगा।

ISIS कमजोर हुआ, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं

अमेरिकी सैन्य अभियान खत्म होने के बावजूद ISIS का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा है। संगठन पहले की तरह इराक के बड़े इलाकों पर नियंत्रण नहीं रखता, लेकिन उसके बचे हुए सदस्य और नेटवर्क कुछ इलाकों में सक्रिय रहने की कोशिश करते हैं।

ऐसे में अमेरिका का जोर अब बड़े सैन्य अभियान के बजाय इराकी सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर रहने की संभावना है।

ईरान समर्थित गुट भी इराक के लिए चुनौती

इराक की सुरक्षा चुनौती सिर्फ ISIS तक सीमित नहीं है। देश में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र गुट भी अमेरिका और इराक के सुरक्षा समीकरण का हिस्सा रहे हैं।

अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन के मिशन के खत्म होने के बाद इराकी सरकार पर इन अलग-अलग सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी।

2024 के समझौते के तहत खत्म हुआ मिशन

अमेरिका और इराक ने सितंबर 2024 में गठबंधन के सैन्य मिशन को समाप्त करने को लेकर समझौता किया था। इसी योजना के तहत अब ‘ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व’ का औपचारिक अंत हुआ है।

इस बदलाव के बाद अमेरिका-इराक संबंधों का फोकस सीधे सैन्य अभियान से हटकर द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग, प्रशिक्षण और खुफिया साझेदारी पर रहेगा।

यानी इराक से अमेरिकी सैन्य मिशन जरूर खत्म हो गया है, लेकिन दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग का सिलसिला जारी रहेगा। अब ISIS और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में इराकी सुरक्षा बलों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होगी।

news desk

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