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क्या ममता की करीबी सायोनी घोष भी हुईं बागी? माला रॉय पर भी सस्पेंस, काकोली के जवाब से मची हलचल

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी सियासी संकट के बीच अब पार्टी की दो चर्चित सांसदों सायोनी घोष और माला रॉय को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। बागी सांसदों के खेमे की अगुवाई कर रहीं काकोली घोष दस्तीदार के एक छोटे से जवाब ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

टीएमसी के भीतर बगावत के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या अभिनेत्री से नेता बनीं सायोनी घोष और वरिष्ठ सांसद माला रॉय भी बागी खेमे में शामिल हो गई हैं। हालांकि दोनों नेताओं की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

काकोली के एक शब्द ने बढ़ाई अटकलें

जब सायोनी घोष और माला रॉय के बागी गुट में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया तो काकोली घोष दस्तीदार ने एक टेक्स्ट मैसेज में सिर्फ “हां” कहकर जवाब दिया। इसके बाद से राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

हालांकि ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस दावे पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि दोनों नेताओं को पार्टी नेतृत्व ने लगातार अहम जिम्मेदारियां दी हैं, ऐसे में उनका बागी खेमे में जाना चौंकाने वाला होगा।

ममता और अभिषेक की भरोसेमंद मानी जाती हैं सायोनी

33 वर्षीय सायोनी घोष को तृणमूल कांग्रेस की युवा राजनीति का बड़ा चेहरा माना जाता है। वह ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों के करीबी नेताओं में गिनी जाती हैं।

2021 के विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा बनाए रखा और उन्हें युवा इकाई की कमान सौंपी। बाद में उन्होंने लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में भी एंट्री की। हालिया विधानसभा चुनावों में भी वह पार्टी की प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल रहीं।

माला रॉय का राजनीतिक सफर भी रहा अहम

माला रॉय लंबे समय से बंगाल की राजनीति में सक्रिय रही हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी और तृणमूल कांग्रेस के गठन के समय ममता बनर्जी के साथ आ गई थीं।

हालांकि बीच में उन्होंने पार्टी छोड़ी, लेकिन बाद में फिर वापसी की और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्हें कोलकाता नगर निगम की चेयरपर्सन बनाया गया और बाद में लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं।

20 सांसदों के बागी होने का दावा

सूत्रों के अनुसार, काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से संपर्क कर एनडीए में शामिल होने की इच्छा जताई है। हालांकि अब तक इन सांसदों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं हुई है।

इसी बीच टीएमसी के दो राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे ने भी पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

टीएमसी नेतृत्व के सामने नई चुनौती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता दिख रहा है। पहले विधायकों की बगावत और अब सांसदों के टूटने की खबरों ने तृणमूल कांग्रेस के सामने बड़ा संगठनात्मक संकट खड़ा कर दिया है।

अगर सायोनी घोष और माला रॉय जैसे बड़े चेहरे भी बागी खेमे में शामिल होते हैं, तो यह ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक तौर पर बड़ा झटका माना जाएगा।

vineet verma

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