नई दिल्ली।देशव्यापी NEET आंदोलन और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग का मामला अब देश की शीर्ष अदालत पहुंच गया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जंतर-मंतर और देशभर में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
चीफ जस्टिस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन होते रहते हैं, लेकिन अगर पुलिस प्रशासन की ओर से ज्यादती हुई है, तो कानून अपना काम करेगा और अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी जरूरी है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने याचिकाओं में लगाए गए गंभीर आरोपों पर चिंता जताते हुए कई घटनाओं का विशेष उल्लेख किया:
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और शादान फरासत ने कोर्ट को बताया कि यह केवल दिल्ली तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार सहित पूरे देश में छात्रों पर अत्याचार हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच (Independent Probe) के संकेत दिए हैं। पीठ ने दोहराया कि अगर इस पूरे घटनाक्रम में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी (Accountability) तय नहीं की जाती, तो किसी भी जांच का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
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