वॉशिंगटन: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने पिछले महीने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक गुप्त सैन्य अभियान चलाया, जिसके जरिए 10 करोड़ बैरल से अधिक तेल को वैश्विक बाजार तक सुरक्षित पहुंचाया गया। हैरानी की बात यह रही कि उनके इस दावे पर अमेरिका के ऊर्जा मंत्री भी अनभिज्ञ नजर आए।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि उन्होंने अमेरिकी सेना को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए एक सीक्रेट मिशन का आदेश दिया था। उनके मुताबिक इस अभियान की वजह से 200 से अधिक कारोबारी जहाज सुरक्षित रूप से इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को पार कर सके।
ट्रंप ने दावा किया कि इस गुप्त ऑपरेशन ने वैश्विक तेल बाजार को बड़ा झटका लगने से बचाया। उनका कहना था कि हर रात लाखों बैरल तेल बाजार तक पहुंचाया गया। अगर यह मिशन नहीं होता तो कच्चे तेल की कीमतें 85-90 डॉलर के बजाय 250 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती थीं।
हालांकि ट्रंप के इन दावों की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, जिससे उनके बयान को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
ट्रंप के दावे के बाद अमेरिकी कांग्रेस में सुनवाई के दौरान ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट से इस कथित ऑपरेशन के बारे में सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे किसी अभियान की जानकारी नहीं है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति का दावा गलत हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता। राइट ने संकेत दिया कि ट्रंप संभवतः ईरानी तेल की सप्लाई और उस पर अमेरिकी रणनीति का जिक्र कर रहे थे।
ट्रंप ने अपने बयान में ईरान पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह अभियान इसलिए सफल हुआ क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का नियंत्रण है, ईरान का नहीं। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना कमजोर पड़ चुकी है और उसकी अर्थव्यवस्था भी गंभीर दबाव में है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी सैन्य या राजनीतिक तनाव का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि यदि शांति समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका और बड़े सैन्य हमले करने से पीछे नहीं हटेगा।
ट्रंप ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमत हो चुका है, लेकिन अंतिम समझौते पर अभी हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। इसके बावजूद अमेरिका कूटनीतिक समाधान की संभावना खुली रखना चाहता है और ऐसा समझौता चाहता है जो लंबे समय तक प्रभावी साबित हो।
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