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होर्मुज पर छिड़ी महाशक्तियों की जंग! ईरान बोला- ‘परमाणु बम से भी ज्यादा अहम’, ट्रंप की चेतावनी के बाद क्या भड़क सकता है बड़ा युद्ध?

नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब और तीखा होता नजर आ रहा है। ईरान ने इसे अपने लिए परमाणु बम से भी अधिक महत्वपूर्ण बताया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि होर्मुज किसी एक देश की जागीर नहीं है। दोनों देशों के लगातार आक्रामक बयानों और सैन्य गतिविधियों ने खाड़ी क्षेत्र में नए तनाव की आशंका बढ़ा दी है।

ईरान ने होर्मुज को बताया सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार

ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दर्जनों परमाणु बमों से भी ज्यादा अहम है और इस्लामिक गणराज्य इसकी हर हाल में रक्षा करेगा। उनका कहना है कि यह समुद्री मार्ग ईरान की रणनीतिक ताकत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अमेरिका ने दावे को किया खारिज

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के इस दावे पर कि उसकी निगरानी के बिना कोई विदेशी जहाज होर्मुज से नहीं गुजर सकता, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कड़ा जवाब दिया। अमेरिका ने कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और इस पर किसी एक देश का नियंत्रण स्वीकार नहीं किया जा सकता। अमेरिकी सेना इसे खुला और सुरक्षित बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ट्रंप ने ईरान को दी सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमलों से पहले ईरान एक बेहतर समझौते के लिए तैयार हो गया था, लेकिन बाद में उसने ड्रोन से एक जहाज को निशाना बनाया। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को “बीमार सोच वाला” बताते हुए कहा कि अमेरिका ने जवाब में जोरदार कार्रवाई की है और होर्मुज अब भी खुला है।

ईरान के लिए क्यों इतना अहम है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय से वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग रहा है। ईरान पहले भी यहां समुद्री गतिविधियों को लेकर दबाव बनाने की रणनीति अपनाता रहा है। मौजूदा संघर्ष के बीच तेहरान इसे अपनी सामरिक ताकत और क्षेत्रीय प्रभाव के प्रतीक के रूप में पेश कर रहा है।

अमेरिकी राजदूत ने भी दो टूक संदेश दिया

नाटो में अमेरिका के राजदूत मैथ्यू व्हिटेकर ने कहा कि ईरान के साथ हुई अंतरिम सहमति का एक प्रमुख आधार यह था कि तेहरान होर्मुज में जहाजों को डराने या बाधित करने की कोशिश नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप समझौते के पक्षधर हैं, लेकिन अमेरिका अपनी सुरक्षा और समुद्री आवाजाही से कोई समझौता नहीं करेगा।

दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ा

अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने ईरान के लगभग 140 ठिकानों पर कार्रवाई की, जिनमें मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, गोला-बारूद भंडार, संचार केंद्र और अन्य सैन्य ठिकाने शामिल थे। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों से ईरान की समुद्री क्षेत्र में दबाव बनाने की क्षमता कमजोर हुई है।

वहीं, ईरान की ओर से कहा गया कि एकतरफा समझौतों का दौर खत्म हो चुका है और अब हर कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। इसी बीच बंदर अब्बास और केशम द्वीप के समुद्री इलाके में कई धमाकों की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि इनके कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

क्या खाड़ी में बढ़ सकता है बड़ा सैन्य टकराव?

अमेरिकी नौसेना ने जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से से कई जहाजों को सुरक्षित निकालने का दावा किया है। वहीं ईरान लगातार अपने रुख पर कायम है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां और तीखे बयान इस आशंका को मजबूत कर रहे हैं कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो खाड़ी क्षेत्र में व्यापक सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

 

vineet verma

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