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UP PCS अधिकारी बनने के बाद कहां होती है ट्रेनिंग? कितनी मिलती है सैलरी और IAS से कितना अलग है पूरा सिस्टम

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों का सफर खत्म नहीं होता, बल्कि यहीं से प्रशासनिक जिम्मेदारियों की असली तैयारी शुरू होती है। चयनित पीसीएस अधिकारियों को नियुक्ति से पहले विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें प्रशासनिक कार्यप्रणाली, कानून, राजस्व व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और फील्ड अनुभव जैसी कई अहम चीजें सिखाई जाती हैं। यही प्रशिक्षण उन्हें भविष्य में उपजिलाधिकारी (SDM), खंड विकास अधिकारी (BDO), एआरटीओ समेत विभिन्न प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार करता है।

कहां होती है यूपी पीसीएस अधिकारियों की ट्रेनिंग?

उत्तर प्रदेश के पीसीएस अधिकारियों की मुख्य ट्रेनिंग लखनऊ के अलीगंज स्थित उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (UPAAM) में होती है, जिसे अतरौली हाउस के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा (PPS) के अधिकारियों का प्रशिक्षण मुरादाबाद स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी में कराया जाता है। पीसीएस अधिकारियों का प्रशिक्षण सामान्यतः 12 से 18 महीने तक चलता है।

ट्रेनिंग के दौरान क्या-क्या सिखाया जाता है?

प्रशिक्षण की शुरुआत फाउंडेशन कोर्स से होती है, जिसमें भारतीय संविधान, उत्तर प्रदेश के राजस्व कानून, आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक प्रक्रिया और जनसंपर्क जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा अधिकारियों को गांवों के भ्रमण पर भेजा जाता है, ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों और प्रशासनिक चुनौतियों को समझ सकें।

प्रशिक्षण का हिस्सा राज्य भ्रमण और ‘भारत दर्शन’ भी होता है। इसके जरिए अधिकारियों को विभिन्न सरकारी परियोजनाओं, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जाता है।

पीसीएस अधिकारी को कितनी मिलती है सैलरी?

सातवें वेतन आयोग के अनुसार, पीसीएस अधिकारी का शुरुआती बेसिक वेतन 56,100 रुपये प्रतिमाह होता है। महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य भत्तों को जोड़ने के बाद इन-हैंड सैलरी लगभग 85,000 से 95,000 रुपये तक पहुंच सकती है। इसके अलावा सरकारी आवास, वाहन, सहायक कर्मचारी और चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

पहली पोस्टिंग कब मिलती है?

अकादमी में शुरुआती करीब छह महीने का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अधिकारियों को किसी जिले में प्रशिक्षु अधिकारी (Trainee Officer) के रूप में भेजा जाता है। यहां वे जिलाधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में प्रशासनिक कार्यों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं। लगभग एक वर्ष के फील्ड प्रशिक्षण और विभागीय परीक्षा पूरी करने के बाद पहली स्वतंत्र पोस्टिंग दी जाती है, जो अक्सर एसडीएम जैसे पद पर होती है।

IAS और PCS की ट्रेनिंग में क्या है सबसे बड़ा अंतर?

आईएएस अधिकारियों का प्रशिक्षण मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में होता है, जहां प्रशिक्षण का दायरा राष्ट्रीय स्तर का होता है। वहीं, पीसीएस अधिकारियों की ट्रेनिंग पूरी तरह उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे, कानून और स्थानीय शासन व्यवस्था पर केंद्रित रहती है।

आईएएस अधिकारियों को केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर काम करने का अवसर मिलता है, जबकि पीसीएस अधिकारी मुख्य रूप से राज्य प्रशासन की जिम्मेदारी संभालते हैं। हालांकि, सेवा के लगभग 10 से 15 वर्षों के बाद योग्य पीसीएस अधिकारियों को पदोन्नति के जरिए आईएएस कैडर में शामिल होने का अवसर भी मिल सकता है।

 

vineet verma

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