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‘आतंकी अलर्ट’ से लेकर ‘सदाकत आश्रम’ पर हुए हमले तक बिहार की राजनीति में कैसे ट्रेंड कर रही है ‘वोटर अधिकार यात्रा’?

बिहार: 30 अगस्त को जब राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा गंगा और सोन नदी के दोआब में बसे आरा पहुंची तो यात्रा के 14 दिन पूरे हो चुके थे. कभी कुंवर सिंह और अंग्रेजों की जंग तो कभी रणवीर सेना और माले के संघर्ष के गवाह रहे आरा तक पहुंचने से पहले वोटर अधिकार यात्रा भी तमाम उतार चढ़ाव को देख चुकी थी.

पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी यात्रा में शामिल होकर आरा पहुंचे और बिहार की जनता से बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया. अखिलेश यादव से पहले तमिलनाडु के सीएम स्टालिन भी यात्रा का हिस्सा बन चुके थे. कांग्रेस के अन्य नेता भी समय समय पर यात्रा से जुड़े.

यात्रा में आ रही भीड़ तो पहले दिन से खबरों में थी लेकिन असली चर्चा तब हुई जब इंटेलिजेंस का इनपुट मिला कि 3 संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकी नेपाल से बिहार में घुस गए हैं और यात्रा में गड़बड़ी फैला सकते हैं. इस इनपुट के आधार पर राहुल गांधी की यात्रा का रूट डायवर्ट कर दिया गया. राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया.

नतीजा ये हुआ कि मोतिहारी में होने वाले राहुल गांधी के रोड शो को रद्द कर दिया गया. किसानों से मिलने का प्रोग्राम भी कैंसिल हो गया. हालांकि 29 अगस्त को बिहार पुलिस ने कंफर्म किया कि संदिग्ध आतंकवादी बिहार में नहीं घुसे थे बल्कि दुबई से काठमांडू गए और वहां से मलेशिया चले गए. इसके बाद आतंकियों की खबर पर सियासी नैरेटिव बनने लगी.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा की सफलता से परेशान होकर झूठे नैरेटिव गढ़ रही है. कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी का कहना है कि ‘जो वोटर अधिकार यात्रा है उसे अपार जनसमर्थन मिल रहा है. इससे सरकार घबरा गई है. वो चाहती है कि राहुल गांधी किसानों से ना मिल पाएं, जिनके वोट चोरी हो रहे हैं उनसे ना मिल पाएं. इसलिए मनगढ़ंत कहानियां गढ़ी जा रही हैं’.

हालांकि बिहार में आतंकियों के घुसने की खबर के खंडन से पहले ही एक और बड़ी घटना हो गई. दरभंगा में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की जनसभा के बाद मो. रिजवी उर्फ राजा नाम के युवक ने पीएम मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया. जिसकी प्रतिक्रिया में बीजेपी के कुछ कार्यकर्ता सरकार में मंत्री नितिन नवीन के नेतृत्व में पटना स्थित कांग्रेस दफ्तर में हल्ला बोल करने पहुंच गए. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले में कई नेता घायल हो गए.

बाद में पता चला कि मो. रिजवी कांग्रेस से जुड़ा हुआ नहीं है बल्कि वो असदुद्दीन ओवैसी का प्रशंसक है. इस जानकारी के बाद कांग्रेस अब फ्रंटफुट पर है. सदाकत आश्रम यानी बिहार कांग्रेस का प्रदेश मुख्यालय, यहां हुए बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले का एक नैरेटिव ये भी गया कि बिहार में सीटों के आधार पर चौथे नंबर की पार्टी, सत्ता में बैठी बीजेपी को सीधी चुनौती दे रही है.

कई राजनीतिक विश्लेषक भी मान रहे हैं कि वोटर अधिकार यात्रा को जिस तरह से जनता का समर्थन मिला है और जिस तरह सरकार या बीजेपी उससे उलझती दिखी है, उससे प्रदेश की राजनीति में करीब 35 साल बाद कांग्रेस दोबारा जिंदा हो गई है.

news desk

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