वॉशिंगटन/तेहरान/इस्लामाबाद: मध्य-पूर्व में महायुद्ध की आहट के बीच एक राहत भरी खबर आई है। 28 फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग पर 2 हफ्ते के लिए ‘ब्रेक’ लग गया है। यह समझौता तब हुआ जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को “पूरी सभ्यता मिटाने” की डेडलाइन दी थी। आखिर इस समझौते के पीछे कौन है और ईरान की वे 10 शर्तें क्या हैं जिन्हें ट्रंप ने ‘व्यावहारिक’ माना है? आइए जानते हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि वे ईरान पर जारी बमबारी को 14 दिनों के लिए स्थगित कर रहे हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा:
“पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अनुरोध पर मैं विनाशकारी सैन्य कार्रवाई रोकने को तैयार हूं, बशर्ते ईरान होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को तुरंत सुरक्षित आवाजाही के लिए खोल दे।”
पाकिस्तान का दावा: ट्रंप ने खुद शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के साथ बातचीत का हवाला दिया। हालांकि, शहबाज शरीफ का एक ‘Draft Message’ सोशल मीडिया पर पोस्ट होने से विवाद छिड़ गया, जिससे संकेत मिले कि पटकथा कहीं और लिखी गई थी।
चीन की भूमिका: न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, चीन ने पर्दे के पीछे से ईरान को तनाव कम करने के लिए प्रेरित किया। ट्रंप ने भी स्वीकार किया कि चीन ने तेहरान को सीजफायर के लिए राजी करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि इजरायल इस सीजफायर का हिस्सा है। हालांकि, ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट कुछ और ही इशारा कर रही हैं। द टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, संघर्षविराम की घोषणा के बावजूद इजरायली वायुसेना (IAF) ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं। तेल अवीव अभी भी ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है।
अब पूरी दुनिया की नजरें 10 अप्रैल पर टिकी हैं। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के डेलिगेशन को इस्लामाबाद में आमने-सामने की बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। इस बैठक का उद्देश्य 14 दिनों के भीतर एक स्थायी शांति समझौते (Final Peace Treaty) पर मुहर लगाना है।
ईरान की सुरक्षा परिषद ने संकेत दिया है कि यदि उनकी शर्तें (प्रतिबंध हटाना और परमाणु मान्यता) मानी जाती हैं, तो वे रास्ता खोलने को तैयार हैं। हालांकि, ईरान ने ओमान के साथ मिलकर इस रूट से गुजरने वाले जहाजों पर ‘टोल टैक्स’ वसूलने की नई योजना भी तैयार की है।
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