वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) में पिछले 40 दिनों से जारी भीषण रक्तपात पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (8 अप्रैल) को ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्ध-विराम (Ceasefire) का औपचारिक ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने अपनी “विनाशकारी सैन्य कार्रवाई” को फिलहाल रोक दिया है, जिसके बाद दुनिया ने राहत की सांस ली है।
जंग रुकने से ठीक पहले ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट और बुनियादी ढांचों को तबाह करने की चेतावनी दी थी। अब हुए समझौते के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): सीजफायर की सबसे पहली शर्त यह है कि ईरान इस समुद्री मार्ग को तुरंत और सुरक्षित आवाजाही के लिए खोलेगा।
इस्लामाबाद में महाबैठक: शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय बैठक होगी।
10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव: ट्रंप ने ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को ‘व्यावहारिक’ माना है, वहीं ईरान भी अमेरिका के 15 सूत्रीय फॉर्मूले पर विचार कर रहा है।
बमबारी पर रोक: ट्रंप ने कहा कि वे दो हफ्तों के लिए ईरान पर हमले निलंबित कर रहे हैं, बशर्ते ईरान शर्तों का पालन करे।
इजरायल का रुख: व्हाइट हाउस का दावा है कि इजरायल भी बमबारी रोकने पर सहमत है, हालांकि जमीनी स्तर पर अभी भी तनाव बना हुआ है।
इस सीजफायर के बाद दोनों देशों के बीच बयानों का युद्ध भी शुरू हो गया है:
ईरान का दावा: तेहरान ने इसे अपनी ‘कूटनीतिक जीत’ बताया है। ईरान की सुरक्षा परिषद का कहना है कि ट्रंप को उनकी शर्तें मानने पर मजबूर होना पड़ा।
अमेरिका का जवाब: व्हाइट हाउस ने पलटवार करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना की ताकत ने ईरान को घुटने टेकने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर मजबूर किया है।
भले ही सीजफायर का ऐलान हो गया हो, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में अभी भी मिसाइल अलर्ट जारी हैं। इजरायली सेना के कुछ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि उनकी कार्रवाई पूरी तरह थमी नहीं है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।
ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह लंबी अवधि की शांति के लिए ओमान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने की योजना बना रहा है। इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा। साथ ही, ईरान ने क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी और प्रतिबंध हटाने की शर्त भी रखी है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते का स्वागत किया है। इस डील में लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी जंग रोकने की मांग शामिल है। शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली मीटिंग पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
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