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US-Iran Peace Deal: क्या ट्रंप की ‘त्वरित जीत’ के सामने भारी पड़ेगा ईरान का ‘लॉन्ग टर्म प्लान’? जानें क्या है नया शांति प्रस्ताव

“ईरान और अमेरिका के बीच चली आ रही तनातनी कब खत्म होगी, यह किसी को पता नहीं है; लेकिन दुनिया के कई देश चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच जारी इस रार को जल्द ही खत्म किया जाए तो बेहतर होगा।

दोनों देशों के टकराव की वजह से पूरी दुनिया की इकोनॉमी प्रभावित हो रही है। हालांकि, 14 दिनों के सीजफायर की डेडलाइन अब खत्म होने को है और दोनों ही देश एक बार फिर बातचीत की टेबल पर लौटना चाहते हैं।

इस बीच बड़ी खबर आ रही है कि पाकिस्तान में दूसरे दौर की बातचीत के रास्ते खुलते नजर आ रहे हैं। उधर, यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान में होने वाली इस डील में ईरान या अमेरिका, किसकी जीत होगी? बातचीत की टेबल पर आए दोनों देशों के सामने जो नया समझौता रखा गया है, उसमें कई चीजें चौंकाने वाली हैं।”

पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब समझौते की मेज पर पहुंच गया है। बुधवार को होने वाली दूसरे दौर की इस बैठक में एक नए शांति प्रस्ताव (Peace Proposal) पर चर्चा होगी।

जहाँ एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप साल 2015 के ‘ओबामा समझौते’ से बेहतर डील करने का दावा कर रहे हैं, वहीं कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस नए प्रस्ताव में ईरान का पक्ष काफी मजबूत दिख रहा है।

शांति प्रस्ताव के 4 प्रमुख बिंदु: क्या हैं शर्तें?

अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के अनुसार, इस नए ड्राफ्ट में कई अहम बदलाव किए गए हैं…

20 साल का नो-वॉर एग्रीमेंट: प्रस्ताव के तहत अगले 20 वर्षों तक ईरान और अमेरिका के बीच कोई युद्ध नहीं होगा। ओबामा शासन के दौरान यह सीमा 15 साल थी। हालांकि, ईरान इसे केवल 10 साल तक ही सीमित रखना चाहता है।

फंड की वापसी: अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई 200 अरब डॉलर की विशाल राशि को चरणबद्ध तरीके से जारी करेगा। ईरान चाहता है कि राहत कार्यों के लिए समझौते के तुरंत बाद 27 अरब डॉलर अनफ्रीज किए जाएं।

यूरेनियम पर नरमी: अब तक अमेरिका ईरान को यूरेनियम के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दे रहा था, लेकिन नए प्रस्ताव में नागरिक ऊर्जा जरूरतों के लिए यूरेनियम संवर्धन की छूट दी जा सकती है।

यूरेनियम को नष्ट करने की जगह (ईरान या अमेरिका) और होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थायी टोल बूथ के निर्माण पर अभी भी पेच फंसा हुआ है।

ईरान का रुख: “हम दबाव में नहीं झुकेंगे”

ईरान की ओर से कमान संभाल रहे मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अमेरिका के मनोवैज्ञानिक दबाव में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि समझौता केवल ईरान के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा। ईरान का मुख्य फोकस ‘लॉन्ग टर्म विनिंग फॉर्मूला’ पर है।

गद्दाफी की गलती से सबक ले रहा है तेहरान

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का नेतृत्व लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी के उदाहरण को देख कर बेहद सतर्क है। 2003 में गद्दाफी ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौता किया था, लेकिन 2011 में अमेरिका के समर्थन वाले विद्रोह में उनकी सत्ता चली गई और हत्या कर दी गई। ईरान नहीं चाहता कि वह यूरेनियम त्यागने के बाद खुद को असुरक्षित महसूस करे।

news desk

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