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“बंगाल चुनाव: TMC पर बदले कांग्रेस के सुर, क्या खत्म हो रहा टकराव?”

पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भाजपा लगातार बड़े दावे कर रही है। भाजपा के अनुसार, उनकी पार्टी इस बार बंगाल में ‘ममता राज’ को खत्म कर अपनी सरकार बनाएगी; लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है।

ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव को लेकर लगातार सक्रिय हैं और मोदी सरकार के साथ-साथ चुनाव आयोग को भी निशाने पर ले रही हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी भी बंगाल चुनाव में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

हालांकि, बंगाल चुनाव में कांग्रेस ने ममता की पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं किया है, लेकिन अब वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर ज्यादा प्रहार करने के बजाय अपने चुनाव अभियान को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।”

पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में एक दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहा है। कुछ समय पहले तक एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के रिश्तों में ‘महिला आरक्षण और परिसीमन’ के मुद्दे ने संजीवनी का काम किया है। दिल्ली में राहुल गांधी के सुझाव पर ममता बनर्जी द्वारा अपने 21 सांसदों को विरोध में उतारने के बाद, बंगाल की राजनीति का मंजर पूरी तरह बदल गया है।

सूत्रों के मुताबिक, महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद सोनिया गांधी ने खुद ममता बनर्जी से फोन पर बात की, वहीं राहुल गांधी ने अभिषेक बनर्जी को धन्यवाद दिया। इस ‘थैंक यू’ डिप्लोमेसी का असर जमीन पर भी दिखने लगा है:

  • चुनावी दूरी: 14 अप्रैल के बाद राहुल गांधी ने बंगाल में कोई रैली नहीं की है।
  • कार्यक्रम रद्द: प्रियंका गांधी का प्रस्तावित बंगाल दौरा और प्रचार कार्यक्रम पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है।
  • खरगे का बदला अंदाज: मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बंगाल के प्रचार में अपना पूरा फोकस सिर्फ भाजपा पर रखा, जबकि टीएमसी के खिलाफ चुप्पी साधे रखी।

अधीर रंजन चौधरी की बढ़ी ‘अग्निपरीक्षा’

पार्टी नेतृत्व के इस बदले हुए स्टैंड ने बंगाल कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे अधीर रंजन चौधरी को धर्मसंकट में डाल दिया है। ममता बनर्जी के धुर विरोधी माने जाने वाले अधीर रंजन, जो बरहामपुर से विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी की ‘मिलीभगत’ को मुद्दा बना रहे थे, अब हाईकमान की नरमी से खासे असहज नजर आ रहे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि गठबंधन की इस ‘अदृश्य डोर’ ने स्थानीय नेताओं के लिए प्रचार करना मुश्किल कर दिया है।

सेकुलर ताकतों को मजबूत करने की दलील

राहुल गांधी के करीबी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व किसी भी कीमत पर ‘सेकुलर ताकतों’ को कमजोर नहीं करना चाहता। उनका मुख्य लक्ष्य केंद्र से भाजपा को हटाना है। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जहां कांग्रेस उम्मीदवार मैदान में हैं, वहां राहुल गांधी विरोधियों के खिलाफ बोलेंगे, लेकिन उनके निशाने पर 75 प्रतिशत भाजपा ही रहेगी।

news desk

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