देश की सबसे प्रेस्टीजियस मेडिकल इंट्रेंस एग्जाम ‘नीट’ (NEET) को लेकर जारी विवाद अब सिर्फ एक कानूनी या राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के होनहार युवाओं की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। पेपर लीक और परीक्षा में हुई धांधलियों से हताश होकर छात्रों के आत्महत्या करने का एक और बेहद दर्दनाक मामला फिरसे सामने आया है।
ताजा घटना तमिलनाडु की है, जहाँ NEET परीक्षा देने वाली एक स्टूडेंट “अनुकीर्तना” ने मेंटल प्रेशर और फ्रस्ट्रेशन के चलते सुसाइड कर लीया। इस दुखद घटना के बाद NEET पेपर लीक विवाद के कारण अपनी जान गंवाने वाले युवाओं की संख्या बढ़कर अब 10 हो गई है।
रिपोर्ट्स और अनुकीर्तना के पेरेंट्स के अनुसार, अनुकीर्तना ने इस साल NEET की परीक्षा के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की थी। डॉक्टर बनने का सपना देख रही अनुकीर्तना को उम्मीद थी कि उसका सिलेक्शन हो जाएगा, लेकिन परीक्षा के बाद देश भर में सामने आए पेपर लीक के मामलों, धांधली के आरोपों और उसके बाद पैदा हुई अनिश्चितता ने उसे गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया। परीक्षा के भविष्य और अपनी मेहनत के बेकार जाने के डर से हताश होकर आखिरकार उसने ये कदम उठा लिया।
NEET परीक्षा और उसके बाद के घटनाक्रमों के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों से अब तक कुल 10 छात्र मौत को गले लगा चुके हैं। अपने बच्चों को खोने वाले इन परिवारों में इस वक्त मातम पसरा है
ऋतिक मिश्रा- लखीमपुर
अंशिका पांडे – आदर्श नगर, दिल्ली
प्रदीप मेघवाल – राजस्थान
सिद्धार्थ हेगड़े
आकांक्षा चतुर्वेदी – मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले
भाग्यश्री पाटिल – कर्नाटक
रेणु मीणा – अलवर के भनोखर गांव की
रिया कुमारी थापा – देहरादून
उमेश माली – राजस्थान के सीकर से
अनुकीर्तना – तमिलनाडु
ये सिर्फ नाम नहीं हैं, बल्कि ये देश के वो होनहार चेहरे थे जो भविष्य में डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहते थे। लेकिन परीक्षा प्रणाली में आई खामियों और मानसिक दबाव को ये सह नहीं पाए।
इस ताजा घटना के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की लापरवाही की सजा देश के बच्चों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। शिक्षाविदों और मनोचिकित्सकों ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने इस मामले में सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने और प्रभावित छात्रों को मानसिक संबल प्रदान करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले को लेकर लगातार सुनवाई चल रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर छात्रों का बढ़ता तनाव एक आपातकालीन स्थिति का रूप लेता जा रहा है।
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