लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव से पहले मतदाता सूची में दर्ज कुछ अजीबोगरीब नामों ने निर्वाचन व्यवस्था में डेटा की शुद्धता और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘राम ने यादव को मारा’, ‘मूर्खचंद यादव’ और पिता के नाम वाले कॉलम में ‘B.Com’ जैसी प्रविष्टियां सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
यह मामला मुख्य रूप से इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सूची में नाम और पारिवारिक विवरण की कई प्रविष्टियां असामान्य पाई गईं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी से जांच कर रिपोर्ट मांगी थी।
नाम की जगह वाक्य, पिता के नाम में दर्ज मिली शैक्षिक योग्यता
मतदाता सूची में सामने आई प्रविष्टियों में सबसे ज्यादा चर्चा उन नामों की है, जिनका अर्थ किसी व्यक्ति के नाम के बजाय एक वाक्य जैसा निकलता है। एक प्रविष्टि में ‘राम ने यादव को मारा’ और दूसरी में ‘राम ने शर्मा को मारा’ जैसी एंट्री सामने आई। कुछ अन्य मामलों में पिता के नाम के कॉलम में ‘B.Com’ दर्ज होने की बात भी रिपोर्ट की गई।
इसके अलावा ‘टक्कर मारना’ और ‘मूर्खचंद यादव’ जैसी प्रविष्टियां भी सामने आई हैं। इन मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि मतदाता पंजीकरण के दौरान भरे गए विवरणों की जांच किस स्तर पर हुई और अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले ऐसी गलतियां कैसे रह गईं।
हालांकि, इन सभी प्रविष्टियों को फर्जी मतदाता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। नाम या विवरण में गड़बड़ी और किसी व्यक्ति की मतदाता के रूप में पात्रता दो अलग-अलग मुद्दे हैं।
सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी या मानवीय चूक?
प्रारंभिक रिपोर्टों में अंग्रेजी से हिंदी में नाम बदलने की प्रक्रिया के दौरान अनुवाद संबंधी गलती की आशंका जताई गई है। तकनीकी रूप से नामों को दूसरी लिपि में लिखने की प्रक्रिया को लिप्यंतरण कहा जाता है, जबकि अनुवाद में शब्दों का अर्थ बदला जाता है।
अगर किसी व्यक्ति के नाम को लिप्यंतरण के बजाय शब्दों के अर्थ के आधार पर बदला गया हो, तो इस तरह की असामान्य प्रविष्टियां बन सकती हैं। हालांकि, इस मामले में प्रत्येक गलती की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच रिपोर्ट से ही हो सकेगी।
इसलिए यह तय करना भी जरूरी है कि गलतियां ऑनलाइन फॉर्म भरने, डेटा प्रोसेसिंग, अनुवाद सॉफ्टवेयर या मानवीय सत्यापन के किस चरण में हुईं।
जिलाधिकारियों और निर्वाचन अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल
मतदाता सूची तैयार करने और उसकी शुद्धता सुनिश्चित करने में निर्वाचन अधिकारियों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में गलत नाम और अन्य विवरण सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण और जांच रिपोर्ट मांगना प्रशासनिक जवाबदेही की प्रक्रिया का हिस्सा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी से जांच रिपोर्ट मांगी थी। मीडिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि मामले की समीक्षा के बाद सुधारात्मक कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
हालांकि, सभी जिलाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होने या पूरे प्रदेश में समान स्तर की गड़बड़ी मिलने का दावा तभी किया जाना चाहिए, जब इसकी आधिकारिक पुष्टि हो।
क्या गलत नाम होने पर मतदाता वोट नहीं डाल पाएंगे?
निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल नाम या अन्य विवरण में मामूली लिपिकीय अथवा छपाई की गलती होने के कारण किसी पात्र मतदाता को मतदान से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के मुताबिक, यदि मतदान अधिकारी अनुमत दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मतदाता की पहचान से संतुष्ट हैं, तो ऐसी मामूली गलती को मतदान में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।
इसका अर्थ यह नहीं है कि पहचान की जांच किए बिना किसी को मतदान की अनुमति दी जाएगी। मतदाता की पहचान और पात्रता की पुष्टि निर्धारित नियमों के अनुसार जरूरी है।
14.81 लाख मतदाताओं की सूची पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान निर्धारित था। इन निर्वाचन क्षेत्रों में करीब 14.81 लाख मतदाता पंजीकृत थे और 2,697 मतदेय स्थल बनाए गए थे।
मतदाता सूची में सामने आई असामान्य प्रविष्टियों ने यह स्पष्ट किया है कि डिजिटल पंजीकरण के साथ-साथ डेटा सत्यापन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अब जांच का अहम सवाल यह है कि गलत प्रविष्टियां किस स्तर पर बनीं, उनकी संख्या कितनी है और उन्हें ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
‘राम ने यादव को मारा’ जैसी प्रविष्टियां केवल असामान्य नामों का मामला नहीं हैं, बल्कि मतदाता रिकॉर्ड तैयार करने और सत्यापित करने की प्रक्रिया की जांच की जरूरत को सामने लाती हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।