उत्तर प्रदेश में खेल सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने और निर्माणाधीन खेल परियोजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए प्रदेश सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चन्द्र यादव ने लखनऊ विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष से एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभागीय अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को दोटूक चेतावनी दी है।
खेल मंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी निर्माण कार्य स्वीकृत लागत (Approved Budget) के भीतर और तय मानकों के अनुसार समय पर पूरे किए जाएं। उन्होंने साफ किया कि अतिरिक्त कार्यों का बहाना बनाकर किसी भी प्रोजेक्ट के बजट को दोबारा संशोधित (Revise) नहीं किया जाएगा।
निर्माण स्थल पर लगेगा प्रोजेक्ट मैनेजर का मोबाइल नंबर, हर महीने होगी जांच
बैठक के दौरान खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने भ्रष्टाचार और लेती-लतीफी को रोकने के लिए कई बड़े फैसले सुनाए:
- रोजाना होगा निरीक्षण: जिस भी जनपद या मंडल में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का काम चल रहा है, वहां के स्थानीय विभागीय अधिकारी को प्रतिदिन (Daily) निर्माण कार्य का भौतिक निरीक्षण करना होगा।
- डीएम की कमेटी करेगी जांच: जनपद में चल रहे कामों की गुणवत्ता की जांच जिलाधिकारी (DM) द्वारा गठित विशेष समिति करेगी। यह समिति हर महीने अपनी जांच रिपोर्ट खेल निदेशालय को सौंपेगी।
- अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी: अगर निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार नहीं पाया गया, तो ठेकेदार के साथ-साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी।
- कार्यस्थल पर लगेगा बोर्ड: हर निर्माण साइट पर एक बड़ा बोर्ड लगाया जाएगा, जिसमें प्रोजेक्ट की स्वीकृत लागत, प्रोजेक्ट मैनेजर का नाम, पदनाम और उनका मोबाइल नंबर साफ-साफ अंकित होगा ताकि जनता को पूरी जानकारी रहे।
100% पूरे हो चुके प्रोजेक्ट्स का तुरंत होगा हस्तांतरण, लोकार्पण की तैयारी
खेल मंत्री ने उन जनपदों के अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए हैं जहां खेल बुनियादी ढांचे का काम 100 प्रतिशत पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर गठित गुणवत्ता समिति से अंतिम जांच कराकर नियमानुसार हस्तांतरण (Handover) की प्रक्रिया तुरंत पूरी की जाए, ताकि इन नई खेल अवस्थापनाओं के लोकार्पण (Inauguration) के लिए जल्द से जल्द तारीखें तय की जा सकें और यूपी के खिलाड़ियों को इनका लाभ मिल सके।
साथ ही शासनादेश के गाइडलाइंस के अनुरूप कार्य पूर्णता की वास्तविक तिथि अंकित करने और संशोधित अनुबंध उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सचिव सुहास एल.वाई. ने दिए उपयोगिता प्रमाण-पत्र (UC) और CMIS पोर्टल को लेकर निर्देश
बैठक में मौजूद खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव सुहास एल० वाई० ने वित्तीय पारदर्शिता को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए:
“विभागीय अधिकारी जब भी किसी स्वीकृत परियोजना के लिए दूसरी किश्त (Second Installment) की मांग करें, तो उससे पहले पूर्व में जारी की गई धनराशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र (Utilization Certificate) संबंधित जिले के जिलाधिकारी से सत्यापित कराकर ही शासन को उपलब्ध कराएं।” सुहास एल० वाई० (सचिव, खेल एवं युवा कल्याण)
इसके अलावा, सचिव ने सी.एम.आई.एस. (CMIS) पोर्टल पर दर्ज सभी खेल परियोजनाओं के डेटा को तत्काल अपडेट करने और शासन स्तर से मास्टर डेटा को पूरी तरह फीड करने के कड़े निर्देश दिए। इस वर्चुअल बैठक में प्रदेश भर के विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के परियोजना प्रबंधक (Project Managers) मुख्य रूप से उपस्थित रहे।