लखनऊ। नारी सशक्तिकरण के लिए बुलाए गए विधानमंडल के विशेष सत्र में गुरुवार को उस समय तनाव बढ़ गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर महिलाओं के अधिकारों का विरोधी होने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री के प्रहार और सपा के ‘अति निंदा प्रस्ताव’ ने सदन के भीतर राजनीतिक तपिश को चरम पर पहुँचा दिया है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान विपक्ष के पुराने आचरण को कटघरे में खड़ा किया।
दूसरी ओर, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘झूठा दुष्प्रचार’ बताया।
अति निंदा प्रस्ताव: सपा ने भाजपा और उसके सहयोगियों के खिलाफ ‘अति निंदा प्रस्ताव’ पारित किया है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा सच में महिलाओं को अधिकार नहीं देना चाहती, बल्कि परिसीमन के बहाने चुनाव जीतना चाहती है।
पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की उपेक्षा: सपा प्रमुख ने तर्क दिया कि भाजपा ने महिला आरक्षण बिल में पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया है।
लागू करने की मंशा पर सवाल: विधान सभा में नेता विरोधी दल माता प्रसाद पांडेय ने निंदा प्रस्ताव पारित घोषित किया। सपा प्रमुख ने कहा कि महिला आरक्षण बिल वर्ष 2023 में पारित होकर कानून बन गया है। सरकार चाहे तो अगले चुनाव में लागू कर सकती है, लेकिन भाजपा सरकार महिला आरक्षण लागू नहीं करना चाहती है। विपक्ष के खिलाफ झूठा दुष्प्रचार कर रही है।
सदन में जहाँ सत्ता पक्ष ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक’ के गिरने को लेकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष इसे ‘नारी को नारा’ बनाने की भाजपाई कोशिश बता रहा है। दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं, लेकिन इस सियासी खींचतान के बीच ‘आधी आबादी’ के वास्तविक सशक्तिकरण का मुद्दा फिलहाल हेडलाइंस और राजनीतिक नफे-नुकसान तक सीमित नजर आ रहा है।
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