राज्य

उद्धव और राज ठाकरे एक मंच पर—‘सत्य मार्च’ में गूंजी लोकतंत्र बचाने की पुकार, 96 लाख फर्जी वोटरों पर गरजा विपक्ष

महाराष्ट्र की राजनीति में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. महा विकास अघाड़ी (MVA) ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ मिलकर मुंबई में ‘सत्य मार्च’ निकाला, जिसमें ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची में धांधली के गंभीर आरोपों को लेकर सत्ताधारी महायुति सरकार (BJP-शिंदे-अजित पवार) को सीधी चुनौती दी गई. पुलिस की इजाजत न मिलने के बावजूद विपक्षी दलों ने आज़ाद मैदान को शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बनाया और ‘लोकतंत्र बचाओ’ के नारे के साथ सरकार पर हमला बोला.

ठाकरे भाइयों की एकजुटता से बदला राजनीतिक समीकरण

इस मार्च की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली घटना रही उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक मंच पर आना. वर्षों की राजनीतिक दूरी के बाद दोनों भाइयों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुटता दिखाई. इस कदम को महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऐतिहासिक पल’ के रूप में देखा जा रहा है. NCP प्रमुख शरद पवार ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए कहा, “यह पहली बार है जब चुनाव आयोग को एक पार्टी की बी-टीम के रूप में देखा जा रहा है.” वहीं उद्धव ठाकरे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “सत्ताधारी दल को भ्रम है कि वे वोट चोरी करके सत्ता में बने रह सकते हैं, लेकिन अब जनता जाग चुकी है.”

MNS प्रमुख राज ठाकरे ने दावा किया कि राज्य में 96 लाख फर्जी वोटर हैं और जब तक मतदाता सूची साफ नहीं होती, तब तक किसी भी तरह का चुनाव कराना लोकतंत्र के साथ अन्याय होगा.

BJP का पलटवार: ‘यह सत्य मार्च नहीं, निराशा मार्च है’


वहीं सत्ताधारी BJP और उसके सहयोगियों ने विपक्ष के इस प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया. उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “यह ‘सत्य मार्च’ नहीं बल्कि ‘निराशा मार्च’ है. चुनावों में हार की निराशा में विपक्ष अब लोकतंत्र पर ही सवाल उठा रहा है.” फडणवीस ने आरोप लगाया कि MVA और MNS का यह गठबंधन सिर्फ इसलिए हुआ है क्योंकि उन्हें आगामी बीएमसी चुनावों में हार का डर सता रहा है.

क्या टलेंगे बीएमसी चुनाव?


इस मार्च के बाद अब बीएमसी और अन्य स्थानीय चुनावों पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. विपक्ष ने मांग की है कि जब तक मतदाता सूची की त्रुटियां दूर नहीं होतीं, तब तक चुनाव स्थगित किए जाएं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ठाकरे भाइयों का यह ऐतिहासिक साथ आना महाराष्ट्र की राजनीति में नया समीकरण तैयार कर सकता है, खासकर मुंबई और ठाणे के वोट बैंक पर इसका गहरा असर पड़ सकता है.

राजनीतिक गलियारों में अब एक ही सवाल गूंज रहा है — क्या ठाकरे बंधु मिलकर महाराष्ट्र की सियासत का ‘नया अध्याय’ लिखने जा रहे हैं?

news desk

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