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लखनऊ की निहारी, बिरयानी, चाट….को मिला दुनिया में सम्मान, क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी में शुमार भारत का एकमात्र शहर

यूनेस्को ने हाल ही में “क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी” की सूची जारी की. जिसमें दुनिया भर के 58 शहरों को चुना गया. 100 से ज्यादा देशों के 408 शहरों के बीच यूनेस्को के महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने जिन 58 शहरों की घोषणा की उनमें भारत का एकमात्र शहर लखनऊ है.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को मिले इस सम्मान के पीछे सदियों पुरानी रसोई की परंपराओं और राज़नशी रेसिपी से तैयार जायके की महक है. चलिये पुराने लखनऊ की स्वाद और महक से भरी तंग गलियों की ओर तो मिलता है खाने का खजाना. जिसे लूटने की नहीं बल्कि उसमें खो जाने का मन करता है.

सुबह और नाश्ते का 130 साल पुराना रिश्ता

अकबरी गेट की रहीम कुलचा निहारी के मालिक अयाज़ अहमद ने बताते हैं कि ‘1895 से हमारी दुकान सुबह 5 बजे खुलती है. निहारी 12 घंटे धीमी आंच पर पकती है. तो कुलचा तंदूर में ताजा सेंका जाता है. अयाज़ ने गर्व जताते हुए कहा कि, “यूनेस्को ने हमारी मेहनत को सलाम किया. अब विदेशी भी चखेंगे लखनऊ की सुबह”.

119 साल पुरानी 112 मसालों की जादूगरी

चौक के मशहूर टुंडे कबाबी के मालिक ने बताया, “हमारा सिलसिला 1905 में हाजी मुराद अली से शुरू हुआ. वो एक हाथ के थे, इसलिए ‘टुंडे’ कहलाए और उनके बनाए कबाब का नाम भी टुंडे रखा गया. 112 मसालों का सीक्रेट मिश्रण आज भी उसी पुराने तंदूर में तैयार होता है जिसे याद भर कर लेने से मुंह में पानी आ जाता है.

लखनऊ की बिरयानी का धुआं पेरिस तक जाएगा…

बात बिरयानी की हो तो चौक के राजा बाजार पर स्थित इदरीस बिरयानी का नाम जेहन में आ ही जाता है. अबूबकर बताते हैं कि “1945 में मेरे दादा ने शुरू किया. हम दम बिरयानी बनाते हैं चावल और गोश्त अलग पकाकर, फिर कोयले की आंच पर 40 मिनट दम देते हैं’. यूनेस्को टैग पर वो मुस्कुराए और कहा “अब हमारी बिरयानी का धुआं पेरिस तक जाएगा”.

सर्दियों की शान मशहूर मक्खन मलाई

लखनऊ की सर्दियों का साथ निभाती है रात भर शबनम से भीगी मशहूर मक्खन मलाई. चौक की मशहूर स्वीट्स के ऑनर बताते हैं कि “1925 से ये सिलसिला चल रहा है. दूध की मलाई को रातभर ओस में रखकर जमा करते हैं, फिर केसर, इलायची और चीनी मिलाते हैं. कोई आइस, कोई फ्रीजर का इस्तेमाल नहीं किया जाता, सिर्फ प्रकृति का जादू है”.

स्टार स्ट्रीट फूड बास्केट चाट का जलवा

लखनऊ के हजरतगंज में स्थित रॉयल कैफे की बास्केट चाट शहर की सबसे मशहूर स्ट्रीट फूड्स में से एक है, जो 1930 से चली आ रही नवाबी स्वाद की पुरानी विरासत है. क्रिस्पी आलू का बास्केट तंदूर में ताजा भूना जाता है, जिसमें भरकर परोसी जाती है, आलू टिक्की, दही भल्ला, छोले, सेव, गोलगप्पे और दो तरह की चटनी. काली चटनी का तीखापन, मीठी चटनी की मिठास और नींबू का तड़का इसे अनोखा बनाता है.

यूनेस्को की गैस्ट्रोनॉमी मान्यता के बाद जिन व्यंजनों के लती लखनऊ और आस पास के लोग हैं वो अब दुनिया की कमजोरी बनेंगी.

news desk

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