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Israel Election 2026: नेतन्याहू के सामने बड़ी चुनौती, गादी आइजेनकोट की पार्टी सर्वे में आगे; क्या बदल जाएगा सत्ता का समीकरण?

तेल अवीव। इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट की याशार पार्टी ने हालिया सर्वे में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को पीछे छोड़ दिया है। सर्वे के मुताबिक याशार को 25 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि लिकुड 21 सीटों पर सिमट सकती है।

हालांकि, यह सिर्फ एक सर्वे का अनुमान है और अलग-अलग सर्वेक्षणों में तस्वीर बदलती रही है। ऐसे में चुनाव तक राजनीतिक समीकरणों में कई बदलाव संभव हैं।

कौन हैं गादी आइजेनकोट, जो नेतन्याहू को दे रहे चुनौती?

गादी आइजेनकोट इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं। उनकी सैन्य पृष्ठभूमि उन्हें सुरक्षा और युद्ध जैसे मुद्दों पर मजबूत चेहरा बनाती है।

राजनीति में उन्होंने याशार पार्टी के जरिए खुद को केंद्र और मध्यमार्गी दक्षिणपंथी मतदाताओं के विकल्प के रूप में पेश किया है। उनकी पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता देती है।

7 अक्टूबर 2023 के हमले की स्वतंत्र राज्य जांच की मांग भी आइजेनकोट के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल है।

बेटे और भतीजों की मौत ने बदली आइजेनकोट की राजनीतिक छवि

आइजेनकोट की निजी जिंदगी भी इजरायल के मौजूदा युद्ध से गहराई से जुड़ी रही है। गाजा युद्ध के दौरान उनके बेटे गैल और दो भतीजों की मौत हुई।

इस व्यक्तिगत त्रासदी ने उन्हें युद्ध और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अलग तरह की विश्वसनीयता दी है। 2024 में उन्होंने नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट से इस्तीफा भी दे दिया था। इसके बाद उन्होंने सरकार की युद्ध रणनीति और फैसलों पर सवाल उठाए।

याशार को क्यों मिल रहा है मतदाताओं का समर्थन?

इजरायल में 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था, बंधकों की वापसी, युद्ध की रणनीति और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं।

इसी माहौल में आइजेनकोट खुद को अपेक्षाकृत शांत, व्यावहारिक और सुरक्षा मामलों की समझ रखने वाले नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं। उनकी सैन्य पृष्ठभूमि उन मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है जो सुरक्षा के साथ-साथ सरकार में बदलाव चाहते हैं।

हालिया सर्वेक्षणों में याशार को करीब 21 से 25 सीटों के बीच दिखाया गया है। हालांकि, अलग-अलग सर्वे में आंकड़े बदल रहे हैं, इसलिए इसे चुनाव का अंतिम संकेत नहीं माना जा सकता।

चुनाव में कौन से मुद्दे रहेंगे सबसे अहम?

इजरायल के आगामी चुनाव में कई मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।

7 अक्टूबर हमले की जवाबदेही: हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्ष स्वतंत्र राज्य जांच आयोग की मांग करता रहा है।

गाजा युद्ध और सुरक्षा नीति: लंबे सैन्य अभियान, बंधकों की वापसी और भविष्य की सुरक्षा रणनीति चुनाव के बड़े मुद्दे हैं।

अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की सैन्य सेवा: सैन्य सेवा से छूट का मुद्दा धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष समूहों के बीच बड़ा राजनीतिक विवाद बना हुआ है।

महंगाई और जीवन-यापन की लागत: बढ़ती कीमतें और घरेलू खर्च भी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे हैं।

क्या याशार की चार सीटों की बढ़त से नेतन्याहू की सत्ता खतरे में?

सर्वे में लिकुड पर चार सीटों की बढ़त आइजेनकोट के लिए निश्चित रूप से बड़ा संकेत है, लेकिन यह बढ़त अपने आप में सरकार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

इजरायल की नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। इसलिए असली मुकाबला सिर्फ याशार और लिकुड के बीच नहीं है। छोटे दक्षिणपंथी दल, अरब पार्टियां और अन्य राजनीतिक गठबंधन चुनाव के बाद सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

यही नेतन्याहू और आइजेनकोट की सबसे बड़ी चुनौती है। आइजेनकोट को अपनी मौजूदा लोकप्रियता को सीटों में बदलने के साथ-साथ चुनाव बाद सहयोगियों का समर्थन जुटाना होगा। वहीं नेतन्याहू की कोशिश लिकुड के आधार को मजबूत करने और संभावित गठबंधन सहयोगियों को अपने साथ बनाए रखने की होगी।

27 अक्टूबर का चुनाव क्यों है खास?

अगर याशार पार्टी लगातार सर्वे में अपनी बढ़त बनाए रखती है, तो यह नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक वर्चस्व के लिए बड़ा झटका हो सकता है। लेकिन इजरायल की गठबंधन आधारित राजनीति में किसी एक पार्टी का सबसे बड़ी पार्टी बनना और सरकार बना लेना दो अलग-अलग बातें हैं।

इसलिए 27 अक्टूबर के चुनाव में सिर्फ यह देखना अहम नहीं होगा कि याशार और लिकुड में कौन आगे रहता है, बल्कि यह भी तय करेगा कि कौन-सा राजनीतिक गठबंधन 61 सीटों का जादुई आंकड़ा हासिल करने की स्थिति में आता है।

news desk

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