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तो क्या शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगेगा प्रशासन? मनाने में जुटे लखनऊ के दो बड़े अधिकारी!

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों सुर्खियों में हैं और उन्होंने योगी-मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इतना ही नहीं, प्रयागराज में मौनी अमावस्या स्नान पर्व को लेकर हुए विवाद ने यूपी सरकार की नींद उड़ाकर रख दी है।

हाल ही में अमित शाह का एक बयान भी सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि जो सरकार सनातन धर्म के मूल्यों को कायम रखने में विफल रहती है, वह कभी सत्ता में वापस नहीं आ सकती। उनके इस बयान के बाद बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या यूपी सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है।

इसी का ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब प्रशासन की ओर से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने की कोशिश शुरू हुई। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, माघ मेला क्षेत्र छोड़ने के बाद अब लखनऊ के बड़े अधिकारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें माघी पूर्णिमा पर संगम में स्नान करने के लिए राजी करने में जुटे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ के दो वरिष्ठ अधिकारी माघी पूर्णिमा पर्व पर संगम स्नान के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, शंकराचार्य इस पर तैयार नहीं हैं। उन्होंने अपनी शर्तें भी स्पष्ट कर दी हैं-दोषी अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी, विशेषकर उनके बटुक शिष्यों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार करने वाले अधिकारियों को।

माघी पूर्णिमा पर्व पर अधिकारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में स्नान कराने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अभी इस पर अपनी स्वीकृति नहीं दी है। उन्होंने शर्त रखी है कि चारों पीठ के शंकराचार्यों के स्नान के लिए उचित प्रोटोकॉल बनाया जाए। सूत्रों के अनुसार, लखनऊ के अधिकारी अब उनकी शर्तों पर सहमति जता चुके हैं, जिससे विवाद सुलझने के आसार बन रहे हैं।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 28 जनवरी को दोपहर लगभग 12 बजे माघ मेला क्षेत्र छोड़ दिया था और इसके बाद काशी में अपने शिष्यों के साथ रुके हुए हैं। बताया जा रहा है कि लखनऊ के दो अधिकारी पिछले दो दिनों से लगातार उनके संपर्क में हैं और उन्हें माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान के लिए राजी करने की कवायद में लगे हुए हैं।

अमित शाह ने क्या कहा था?

गुजरात की राजधानी गांधीनगर में स्वामीनारायण संप्रदाय की एक सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि विभिन्न सनातन परंपराओं के अनुयायी देश की आजादी के बाद लंबे समय तक इस उम्मीद में इंतजार करते रहे कि उन्हें ऐसी सरकार मिलेगी, जो सनातन धर्म को उचित महत्व देगी और इसके सिद्धांतों के अनुसार शासन करेगी। उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि संतों के आशीर्वाद से, सनातन धर्म के अनुयायियों को निराश करने वाली कोई भी सरकार इस देश में फिर कभी सत्ता में नहीं आएगी।

news desk

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