वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व (Middle East) में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान द्वारा भेजे गए ‘शांति समझौते’ के मसौदे को फिलहाल स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। ट्रम्प ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उन्हें डील का ‘कॉन्सेप्ट’ तो बताया गया है, लेकिन जब तक पूरा लिखित प्रस्ताव सामने नहीं आता और उनकी शर्तें नहीं मानी जातीं, तब तक कोई समझौता नहीं होगा।
फ्लोरिडा से मियामी के लिए रवाना होते समय ट्रम्प ने जो तेवर दिखाए, उससे साफ है कि दुनिया पर मंडरा रहा युद्ध का खतरा अभी टला नहीं है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ईरान का ‘ऑफर’ और ट्रम्प का ‘वीटो’
ईरान ने एक बड़ा दांव चलते हुए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने का प्रस्ताव दिया था।
ईरान का प्रस्ताव क्या था?
- समुद्री रास्ता: ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू करने को तैयार है।
- बदले में मांग: अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी (Naval Blockade) को तुरंत खत्म करे।
- परमाणु मुद्दा: ईरान चाहता है कि परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा बाद में हो, पहले व्यापारिक रास्ते खोले जाएं।
ट्रम्प ने क्यों ठुकराया?
ट्रम्प का मानना है कि ईरान ने अब तक अपने किए की ‘पर्याप्त कीमत’ नहीं चुकाई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि ईरान का वर्तमान प्रस्ताव ‘स्वीकार करने लायक’ नहीं है।
ईरान की 14 शर्तें: मुआवजे से लेकर सेना हटाने तक की मांग
- मध्यस्थों के जरिए जो 14 सूत्रीय प्रस्ताव अमेरिका को भेजा गया है, उसमें ईरान ने बेहद सख्त शर्तें रखी हैं:
- संपत्ति की वापसी: विदेशों में जब्त की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति वापस दी जाए।
- सैन्य वापसी: ईरान के पड़ोसी इलाकों से अमेरिकी सेना पूरी तरह हट जाए।
- युद्ध का हर्जाना: अब तक हुए सैन्य नुकसान का मुआवजा अमेरिका भरे।
- लेबनान फ्रंट: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत विराम दिया जाए।
क्या फिर होगा हमला? ट्रंप का ‘सस्पेंस’ बरकरार
जब पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि क्या वे ईरान पर फिर से हमला करेंगे, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा, “मैं इस बारे में सीधा जवाब नहीं देना चाहता, लेकिन यह विकल्प (공격) अभी भी खुला हुआ है।” बता दें कि 8 अप्रैल से अमेरिका और इजराइल ने हमले रोके हुए हैं, लेकिन पक्का समझौता न होने से तनाव चरम पर है।
दुनिया के लिए क्यों बढ़ी टेंशन?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। अगर ट्रम्प और ईरान के बीच यह बातचीत विफल होती है और होर्मुज का रास्ता बंद रहता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।