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G7 में जेलेंस्की से मुलाकात के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान! रूस के सस्ते तेल पर खत्म हो सकती है छूट, भारत समेत दुनिया की नजर अगले फैसले पर

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात के बाद रूस को लेकर बड़ा संकेत दिया है। ट्रंप ने कहा है कि रूसी तेल पर दी गई विशेष छूट को अब समाप्त किया जा सकता है। इस बयान को रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक ऊर्जा बाजार के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान से जुड़ा तनाव कम होने और तेल आपूर्ति स्थिति सामान्य होने के बाद अब रूस को दी जा रही राहत जारी रखने की जरूरत पहले जैसी नहीं रह गई है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा आयातक देशों की नजर अमेरिका की अगली रणनीति पर टिक गई है।

G7 बैठक के बाद ट्रंप ने क्या कहा?

मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अब तेल आपूर्ति को लेकर हालात पहले जैसे दबाव वाले नहीं हैं और जल्द इस दिशा में फैसला लिया जा सकता है। उनका संकेत रूस से जुड़े ऊर्जा प्रावधानों और पहले दी गई राहतों की समीक्षा की तरफ माना जा रहा है।

पिछले महीनों में पश्चिम एशिया में तनाव और तेल कीमतों में उछाल के दौरान कई देशों को रूसी तेल खरीद व्यवस्था में कुछ राहत दी गई थी ताकि वैश्विक महंगाई और ऊर्जा संकट को नियंत्रित रखा जा सके।

ईरान तनाव कम होने के बाद रूस पर क्यों बढ़ सकता है दबाव?

ट्रंप के बयान से यह संकेत निकल रहा है कि अब अमेरिकी प्रशासन का रणनीतिक फोकस फिर से रूस-यूक्रेन संघर्ष पर लौट सकता है। तेल बाजार में अपेक्षाकृत स्थिरता आने के बाद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की संभावनाएं फिर चर्चा में हैं।

यूक्रेन समर्थक देशों की ओर से पहले भी यह सवाल उठाया जाता रहा था कि रूस से तेल खरीद में राहत अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को की आर्थिक स्थिति को सहारा देती है। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप का नया बयान अहम माना जा रहा है।

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत उन देशों में शामिल है जिन्होंने बीते समय में रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदा है। ऐसे में अगर अमेरिका की ओर से नीति में बदलाव होता है या किसी तरह की नई सख्ती लागू होती है, तो ऊर्जा बाजार की दिशा पर असर पड़ सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तेल आपूर्ति पहले की तुलना में अधिक संतुलित दिखाई दे रही है। ऐसे में किसी संभावित बदलाव का असर बाजार की तैयारी और आपूर्ति की उपलब्धता पर भी निर्भर करेगा।

क्या बदल रही है अमेरिका की ऊर्जा रणनीति?

ट्रंप के बयान को केवल रूस नीति नहीं बल्कि अमेरिका की व्यापक ऊर्जा और भू-राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। संकेत यही हैं कि अमेरिका अब तेल आपूर्ति और वैश्विक दबाव की स्थिति को देखते हुए अपने अगले फैसले अधिक आक्रामक तरीके से लेने की तैयारी में है।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह बयान केवल राजनीतिक संदेश था या वास्तव में रूस से जुड़े ऊर्जा प्रावधानों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

vineet verma

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