अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति एक बार फिर चर्चा में है।
चुनावी झटके के लिए ईरान युद्ध को जिम्मेदार मानने के बावजूद ट्रंप अपने सैन्य फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने स्वीकार किया है कि ईरान के साथ संघर्ष ने पेट्रोल की कीमतें बढ़ाईं और इसका असर मतदाताओं पर पड़ा।
लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या वह दोबारा ईरान पर हमला करने का फैसला लेंगे, तो उनका जवाब था- हां, वह फिर ऐसा करेंगे।
दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिकी चुनाव परिणामों को ट्रंप की राजनीतिक और रणनीतिक हार करार दिया है। वहीं सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने साफ कर दिया है कि अमेरिका में सत्ता का समीकरण बदलने से तेहरान के प्रति वाशिंगटन की नीति नहीं बदलने वाली। ऐसे में सवाल है कि क्या चुनावी हार के बाद ट्रंप ईरान युद्ध को लेकर अपना रुख बदलेंगे या पश्चिम एशिया में टकराव और गहराएगा?
चुनावी हार का ठीकरा ईरान युद्ध पर, ट्रंप ने मानी बात
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बढ़त हासिल कर रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है। इस हार के बाद अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई उनकी पार्टी की चुनावी हार की वजह बनी? इस पर उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी बात काफी हद तक सही है।
दरअसल, जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि रिपब्लिकन पार्टी की हार की सबसे बड़ी वजह ईरान युद्ध है। उनके मुताबिक, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप का समर्थन करने वाले कई मतदाता मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से नाराज थे और इस बार उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी से दूरी बना ली।
ट्रंप ने भी माना कि युद्ध के कारण कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, जिसका असर आम अमेरिकी मतदाताओं पर पड़ा। हालांकि, उन्होंने अपने सैन्य फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अगर उन्हें दोबारा फैसला लेने का मौका मिले तो वह फिर ईरान पर हमला करेंगे।
पेट्रोल महंगा हुआ तो क्या, ईरान को परमाणु ताकत नहीं बनने देंगे
ट्रंप का तर्क है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है। उनके मुताबिक, अल्पकालिक आर्थिक नुकसान के बावजूद ईरान की परमाणु क्षमता को रोकना प्राथमिकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि लंबे समय के लिहाज से सैन्य कार्रवाई ही इसका एकमात्र जवाब था।
यानी एक तरफ ट्रंप यह स्वीकार कर रहे हैं कि ईरान युद्ध ने उनकी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया, वहीं दूसरी तरफ वह अपने फैसले को सही भी ठहरा रहे हैं। यही विरोधाभास अब अमेरिकी राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है।
जेडी वेंस ने भी ट्रंप को घेरा, युद्ध की कीमत पर उठाए सवाल
इस चुनावी हार के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान भी काफी अहम माना जा रहा है। उन्होंने साफ तौर पर ईरान युद्ध को रिपब्लिकन पार्टी की हार की वजह बताया।
वेंस ने अपने बयान में युद्ध की राजनीतिक कीमत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर इस संघर्ष के कारण पार्टी को कांग्रेस में अपना नियंत्रण गंवाना पड़ा है तो इस फैसले का बचाव करने वालों को इसकी जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए।
वेंस का यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ट्रंप प्रशासन के दूसरे सबसे बड़े नेता हैं। ऐसे में ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बयानों में उभरता अंतर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी रणनीतिक मतभेदों की ओर इशारा करता है।
ईरान ने बताया ट्रंप की दोहरी हार, होर्मुज का भी किया जिक्र
अमेरिकी चुनाव परिणामों के बाद ईरान ने भी ट्रंप प्रशासन पर हमला तेज कर दिया है। तेहरान की ओर से चुनावी नतीजों को अमेरिका की रणनीतिक और राजनीतिक कमजोरी के रूप में पेश किया जा रहा है।
ईरान के अधिकारियों ने दावा किया है कि अमेरिका को युद्ध के मैदान के साथ-साथ अपने घरेलू राजनीतिक मोर्चे पर भी नुकसान उठाना पड़ा है। ईरानी पक्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में अमेरिकी रणनीति को चुनौती मिली है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां संघर्ष और आवाजाही में बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
ईरान का कहना है कि युद्ध का आर्थिक बोझ अब अमेरिकी जनता को भी उठाना पड़ रहा है। इस तरह तेहरान अमेरिकी चुनाव के नतीजों को ट्रंप की युद्ध नीति के खिलाफ जनता की प्रतिक्रिया के तौर पर पेश कर रहा है।
मोजतबा खामेनेई का दोटूक संदेश- अमेरिका की नीति नहीं बदलेगी
अमेरिकी चुनाव में ट्रंप की पार्टी को झटका लगने के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में राजनीतिक दलों या सत्ता के समीकरण में बदलाव से ईरान के प्रति उसकी नीति बदलने की उम्मीद करना गलत है।
खामेनेई के मुताबिक, जो लोग यह सोचते हैं कि अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव आने से ईरान के प्रति वाशिंगटन का रवैया बदल जाएगा, वे बड़ी गलतफहमी में हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को रियायतें देने से उसकी दुश्मनी खत्म नहीं होगी। खामेनेई ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगियों ने दोबारा ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई की तो इस बार युद्ध का दायरा पहले से कहीं ज्यादा व्यापक हो सकता है।
उनका यह बयान संकेत देता है कि तेहरान अमेरिकी चुनाव परिणामों के बावजूद अपनी रणनीति में किसी बड़े बदलाव के मूड में नहीं है।
चुनावी हार के बाद ट्रंप के सामने तीन रास्ते
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने ट्रंप प्रशासन के सामने ईरान को लेकर मुश्किल स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ युद्ध जारी रखने का दबाव है तो दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई और पेट्रोल की कीमतों से नाराज मतदाताओं का सवाल है।
अब ट्रंप के सामने तीन संभावित रास्ते हैं। पहला, ईरान के साथ बातचीत के जरिए संघर्ष समाप्त करने की कोशिश। दूसरा, सैन्य कार्रवाई फिर तेज करना। तीसरा, युद्ध को बढ़ाए बिना आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों के जरिए तेहरान को झुकाने की रणनीति जारी रखना।
अमेरिकी राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप चुनावी हार से सबक लेकर ईरान के साथ बातचीत का रास्ता चुनेंगे या अपने पुराने सैन्य रुख पर कायम रहेंगे?
फिलहाल उनके बयान से तो यही संकेत मिलता है कि चुनावी हार के बावजूद ईरान को लेकर उनके तेवर नरम नहीं हुए हैं।