नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष के अनुसार 21 जून की रात 12:23 बजे साहस, ऊर्जा और पराक्रम के कारक मंगल ग्रह शुक्र की राशि वृषभ में प्रवेश करने जा रहे हैं। मंगल का यह राशि परिवर्तन कई राशियों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक वृषभ राशि में मंगल का गोचर जातकों को धैर्य, दृढ़ता और लक्ष्य के प्रति समर्पण तो देता है, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह समय चुनौतियों से भरा भी रह सकता है।
ग्रहों की इस नई चाल का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन तीन राशियों के जातकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। आर्थिक मामलों, करियर, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में सावधानी जरूरी मानी जा रही है।
मिथुन राशि के जातकों के लिए मंगल छठे और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं। अब उनका गोचर बारहवें भाव में होने जा रहा है, जिसे व्यय, नुकसान और गुप्त चिंताओं का भाव माना जाता है।
करियर के क्षेत्र में छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी। व्यवसाय में धन का आगमन तो हो सकता है, लेकिन खर्च भी तेजी से बढ़ सकते हैं।
आर्थिक मोर्चे पर बजट बिगड़ने की आशंका है। ऐसे में अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखना और धन प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा।
पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। वहीं स्वास्थ्य के मामले में गले से जुड़ी समस्याएं, संक्रमण या टॉन्सिल जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।
तुला राशि के लिए मंगल दूसरे और सातवें भाव के स्वामी हैं। उनका गोचर अष्टम भाव में होने जा रहा है, जिसे ज्योतिष में अनिश्चितता, बाधाओं और छिपी चुनौतियों का भाव माना जाता है।
इस दौरान नौकरी और कारोबार में अपेक्षित परिणाम न मिलने से निराशा महसूस हो सकती है। कई जातकों के मन में नौकरी बदलने का विचार भी आ सकता है, लेकिन जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बाद में परेशानी का कारण बन सकता है।
व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। आर्थिक मामलों में जोखिम लेने से बचने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से शेयर बाजार या अन्य सट्टात्मक निवेशों से दूरी बनाना बेहतर रहेगा।
दांपत्य जीवन में भावनात्मक सहयोग की कमी महसूस हो सकती है। मानसिक तनाव बढ़ने से सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं।
कुंभ राशि के जातकों के लिए मंगल तीसरे और दसवें भाव के स्वामी हैं। उनका गोचर चतुर्थ भाव में होने जा रहा है, जो माता, घर, मानसिक शांति और सुख-सुविधाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
नौकरी में असंतोष की भावना बनी रह सकती है। व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी प्रतिस्पर्धा के बीच संघर्ष करना पड़ सकता है। हालांकि आय के अवसर बने रहेंगे, लेकिन लाभ अपेक्षा से कम रह सकता है।
आर्थिक रूप से आमदनी होने के बावजूद बचत करना कठिन हो सकता है। घर की मरम्मत, पारिवारिक जरूरतों या अन्य घरेलू खर्चों पर अतिरिक्त धन खर्च होने की संभावना है।
परिवार में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और जीवनसाथी के साथ विचारों का टकराव होने की आशंका भी रहेगी। हालांकि स्वास्थ्य के लिहाज से यह समय अपेक्षाकृत बेहतर माना जा रहा है और ऊर्जा का स्तर अच्छा बना रह सकता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मिथुन, तुला और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में गुस्से पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। साथ ही बड़े निवेश, जोखिम भरे वित्तीय फैसलों और जल्दबाजी में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों से बचना बेहतर रहेगा। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना गया है।
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