श्रीनगर। जम्मू में रह रहे विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं को कथित तौर पर धमकी दिए जाने के मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कथित धमकी पत्र में करीब आधा दर्जन कश्मीरी हिंदुओं के नाम होने का दावा किया जा रहा है। कुछ लोगों के घर नंबर और गली की जानकारी भी पत्र में दर्ज होने की बात सामने आई है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक पत्र की प्रामाणिकता या इसके पीछे किसी आतंकी संगठन की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकार की ओर से कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में वापसी और पुनर्वास की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित पत्र में निजी जानकारियां कहां से आईं और इसे जारी करने के पीछे किसकी भूमिका है।
कथित पत्र में क्या है?
दावा है कि पत्र यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) के नाम से जारी किया गया है। इसमें कश्मीर से विस्थापित होकर जम्मू में रहने वाले कुछ लोगों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। पत्र में कश्मीरी हिंदुओं को कथित तौर पर ‘व्हाइट कॉलर आतंकवादी’ और ‘गद्दार’ जैसे शब्दों से संबोधित किया गया है।
पत्र में संबंधित लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने की धमकी दिए जाने का भी दावा है। हालांकि, इस पत्र की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और सुरक्षा एजेंसियां इसकी भाषा, स्रोत और सामग्री की जांच कर रही हैं।
नाम-पते की जानकारी ने बढ़ाई सुरक्षा चिंता
मामले में सबसे अहम सवाल कथित पत्र में दर्ज निजी जानकारी को लेकर है। अगर इसमें दिए गए नाम और पते वास्तविक हैं, तो सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ये जानकारियां कथित तौर पर कहां से जुटाई गईं।
जांच एजेंसियां स्थानीय नेटवर्क और उपलब्ध रिकॉर्ड समेत कई पहलुओं को खंगाल रही हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं निजी जानकारी का इस्तेमाल सिर्फ डर पैदा करने के लिए तो नहीं किया गया।
पहले भी कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को धमकी का दावा
यह पहली बार नहीं है जब कश्मीरी हिंदुओं को कथित तौर पर धमकी दिए जाने का मामला सामने आया हो। इससे पहले भी घाटी में सरकारी सेवाओं में काम कर रहे कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाए जाने वाले कथित पत्र की चर्चा हुई थी। उसमें कर्मचारियों के फोन नंबर जैसी जानकारी होने का दावा किया गया था।
ताजा मामले में जम्मू में रह रहे विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है। इससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ गई है।
कश्मीरी हिंदुओं की वापसी की कोशिशों के बीच मामला
केंद्र सरकार कश्मीरी प्रवासियों के रोजगार और पुनर्वास के लिए कई योजनाएं चला रही है। गृह मंत्रालय के अनुसार, कश्मीरी प्रवासियों के लिए स्वीकृत 6,000 सरकारी पदों में से मार्च 2026 तक 5,896 नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके थे।
इसके अलावा घाटी में प्रवासी कर्मचारियों के लिए 20 स्थानों पर 6,000 ट्रांजिट आवास इकाइयों को मंजूरी दी गई है। मार्च 2026 तक 4,112 इकाइयों का निर्माण पूरा हो चुका था और 3,257 इकाइयां आवंटित की जा चुकी थीं।
ऐसे में धमकी का यह मामला विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की वापसी और पुनर्वास की प्रक्रिया को लेकर सुरक्षा चिंताओं को फिर सामने ला रहा है।
राहुल भट की हत्या के बाद बढ़ी थी चिंता
कश्मीर में तैनात कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता मई 2022 में बडगाम में सरकारी कर्मचारी राहुल भट की हत्या के बाद काफी बढ़ गई थी। उनकी हत्या के बाद घाटी में तैनात कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों ने सुरक्षा और स्थानांतरण की मांग को लेकर प्रदर्शन किए थे।
1989-90 के दौरान आतंकवाद और हिंसा के बीच बड़ी संख्या में कश्मीरी हिंदुओं को घाटी छोड़कर जम्मू और देश के अन्य हिस्सों में जाना पड़ा था। इसके बाद से उनकी वापसी और पुनर्वास लगातार राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है।
BJP नेता अशोक कौल बोले- वापसी के लिए भरोसा जरूरी
जम्मू-कश्मीर भाजपा के महासचिव (संगठन) अशोक कौल ने कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में वापसी को सकारात्मक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि वापसी और पुनर्वास की प्रक्रिया आसान नहीं है और इसके लिए सामाजिक सौहार्द तथा आपसी विश्वास को मजबूत करना जरूरी है।
कौल ने कहा कि अलग-अलग समुदायों के बीच भाईचारा मजबूत होने से ऐसा माहौल बनाया जा सकता है, जिसमें कश्मीरी हिंदू खुद को सुरक्षित महसूस करें और अपने पैतृक स्थानों पर दोबारा जीवन शुरू कर सकें।
निजी जानकारी कैसे पहुंची, यही सबसे बड़ा सवाल
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों के सामने दो अहम सवाल हैं—क्या कथित धमकी पत्र वास्तव में किसी आतंकी संगठन से जुड़ा है और इसमें मौजूद निजी जानकारी कहां से हासिल की गई?
पत्र की प्रामाणिकता की जांच के साथ सुरक्षा एजेंसियां इस बात पर भी नजर रख रही हैं कि कहीं इस तरह की धमकियों का मकसद कश्मीरी हिंदुओं में डर पैदा करना और घाटी में उनकी वापसी की कोशिशों को प्रभावित करना तो नहीं है।