भारतीय राजनीति में ‘प्रतीक’ और ‘नैरेटिव’ की जंग नई नहीं है, लेकिन कांग्रेस ने इस बार राहुल गांधी के 56वें जन्मदिन पर जिस नए सियासी चेहरे को पेश किया है, वह बेहद चौंकाने वाला और दूरगामी है।
वाराणसी के पौराणिक गंगा घाट पर जब यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी की एक अनोखी तस्वीर का दूध से अभिषेक किया, तो वह सिर्फ एक जन्मदिन का जश्न नहीं था। वह भारतीय राजनीति के दो सबसे बड़े छोरों सनातन आस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों को एक साथ जोड़ने की एक बेहद सोची-समझी कोशिश थी।
इस वायरल पोस्टर में राहुल गांधी के एक हाथ में भगवान परशुराम का ‘फरसा’ है, तो दूसरे हाथ में बाबासाहेब का ‘संविधान’। यह नया अवतार आज की राजनीति के बदलते मिजाज की एक बड़ी कहानी कह रहा है।
बनारस के गंगा घाट पर वैदिक रीति-रिवाजों, मंत्रोच्चार और गंगा जल-दूध के अभिषेक के साथ मनाए गए इस जन्मदिन ने सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल तेज कर दी है। पोस्टर का यह कॉम्बिनेशन पारंपरिक और आधुनिक विचारधाराओं का एक अनूठा संगम है:
पिछले कुछ सालों में बीजेपी के राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के नैरेटिव के सामने कांग्रेस अक्सर रक्षात्मक मुद्रा में दिखती थी। लेकिन इस बार राहुल गांधी को परशुराम के अवतार में पेश करना कांग्रेस की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की रणनीति का अगला और आक्रामक चरण है।
कांग्रेस खुद को एक ऐसी पार्टी के रूप में प्रोजेक्ट कर रही है जो सनातन परंपराओं का सम्मान तो करती है, लेकिन धर्म का इस्तेमाल विभाजन के लिए नहीं बल्कि लोक-कल्याण के लिए करती है। यह तस्वीर दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों (जिन्हें संविधान से आरक्षण का हक मिलता है) और सवर्णों (जो भगवान परशुराम को अपनी अस्मिता मानते हैं) के बीच के सामाजिक फासले को पाटने की एक मानवीय कोशिश भी है।
सियासी मायने: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी खुद को देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के सबसे बड़े रक्षक के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। यह पोस्टर उनके इसी संकल्प को एक धार्मिक और सामाजिक स्वीकार्यता देने का प्रयास है।
एक इंसान के तौर पर अगर हम देखें, तो भारतीय समाज हमेशा से आस्था और अधिकारों के बीच जीता आया है। एक आम नागरिक सुबह मंदिर में सिर झुकाता है और दोपहर में अपने अधिकारों के लिए संविधान और कानून का दरवाजा खटखटाता है। कांग्रेस ने जनता के इसी ‘ह्यूमन नेचर’ को पकड़ने की कोशिश की है।
परेशानी तब होती है जब राजनीति में धर्म का तड़का जरूरत से ज्यादा लग जाता है। क्या आम जनता राहुल गांधी के इस ‘परशुराम अवतार’ को एक सच्चे सांस्कृतिक बदलाव के रूप में देखेगी या इसे महज एक और चुनावी पैंतरा समझेगी? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना साफ है कि राहुल गांधी ने अब बीजेपी की पिच पर आकर, उन्हीं के प्रतीकों के सहारे एक नई और बड़ी राजनीतिक लड़ाई छेड़ दी है।
बिग बॉस 'OTT 2' की लाइमलाइट से सीधे दिलों पर राज करने वाली खूबसूरत अभिनेत्री…
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजे सामने आ चुके हैं। 18 सितंबर…
जहाँ एक तरफ एप्पल ने iPhone 18 और iPhone 18 Pro को बाजार में उतारा…
एक तरफ आस्था और दर्शन की उमंग, तो दूसरी तरफ मौत का ऐसा खौफनाक मंजर…
मशहूर कॉमेडियन समय रैना का पॉपुलर शो ‘इंडियंस गॉट लेटेंट’ सीजन 2 के साथ एक…
मुंबई: करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन की फिल्म ‘दायरा’ ने बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत…